‘मोदी की गारंटी’ की वादाखिलाफी पर फूटा कर्मचारियों का गुस्सा: आर्थिक शोषण के खिलाफ 55 से ज्यादा संगठन एकजुट, 11 सितंबर को इंद्रावती भवन के सामने बड़ा प्रदर्शन…

रायपुर। प्रदेश सरकार की नीतियों और कथित आर्थिक शोषण के खिलाफ नियमित, अनियमित कर्मचारियों और पेंशनरों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ‘एक मांग एक मंच’ अभियान के तहत 55 से अधिक कर्मचारी संगठनों ने लामबंद होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 5 सूत्रीय ज्वलंत मांगों को लेकर 11 सितंबर को दोपहर 1:00 बजे नया रायपुर स्थित विभागाध्यक्ष भवन (इंद्रावती भवन) के गेट नंबर-3 पर जोरदार संयुक्त सांकेतिक प्रदर्शन किया जाएगा।
‘मोदी की गारंटी’ के नाम पर ढाई साल से छल का आरोप – अनियमित कर्मचारी फेडरेशन के प्रांतीय नेतृत्व गोपाल प्रसाद साहू ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि ‘मोदी की गारंटी 2023’ के घोषणा पत्र में (पृष्ठ 26 से 30) कर्मचारियों, अनियमित कर्मियों और पेंशनरों से किए गए वादों से सरकार पूरी तरह मुकर चुकी है। पिछले ढाई वर्षों से कर्मचारियों को केवल कोरे आश्वासन मिले हैं। संवाद के सारे रास्ते बंद होने, मुख्य सचिव व वित्त सचिव स्तर पर वार्ता विफल रहने के बाद अब कर्मचारियों के पास सड़क पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

डीए एरियर्स हड़पने और ठेका प्रथा थोपने का तीखा विरोध – छग प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष करन सिंह अटेरिया और संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय संयोजक अनिल शुक्ला ने आरोप लगाया कि वित्त विभाग कर्मचारियों का आर्थिक दमन कर रहा है। समय पर महंगाई भत्ता (DA) न देना और महीनों का एरियर्स दबाकर बैठना सरकार की स्थायी नीति बन चुकी है। 13 सितंबर 2025 को वित्त मंत्री द्वारा केंद्र के समान देय तिथि से डीए देने का वादा भी हवा-हवाई साबित हुआ।
वहीं जितेन्द्र सिंह ठाकुर ने स्वास्थ्य विभाग में लैब और फार्मेसी जैसी सेवाओं में गुपचुप तरीके से ठेका प्रथा लागू करने और नगरीय निकायों में पुरानी पेंशन (OPS) न देने को युवाओं व कर्मचारियों के भविष्य पर सीधा कुठाराघात करार दिया।
कर्मचारियों की 5 सूत्रीय प्रमुख मांगें :
- डीए व 86 माह का एरियर्स : कर्मचारियों और पेंशनरों को जनवरी 2026 की स्थिति से महंगाई भत्ता जारी किया जाए तथा लंबित 86 महीनों के एरियर्स का एकमुश्त भुगतान हो।
- नियमितीकरण व ठेका प्रथा बंद : अनियमित कर्मियों का नियमितीकरण हो, निकाले गए कर्मियों की बहाली, न्यूनतम वेतन की गारंटी, अंशकालीन कर्मियों को पूर्णकालीन दर्जा मिले और आउटसोर्सिंग/ठेका भर्ती पर पूर्ण रोक लगे।
- पुरानी पेंशन (OPS) : नगरीय निकाय के समस्त कर्मचारियों के लिए तत्काल पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए।
- स्वास्थ्य विभाग से ठेकेदारी खत्म : स्वास्थ्य विभाग में लैब एवं फार्मेसी से ठेका पद्धति तुरंत समाप्त की जाए।
- ₹20 लाख तक कैशलेस इलाज : मध्य प्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के सभी नियमित, अनियमित कर्मियों और पेंशनरों के लिए 20 लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू हो।
कर्मचारी नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने 11 सितंबर के सांकेतिक प्रदर्शन के बाद भी कर्मचारियों के हक पर फैसला नहीं लिया, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन प्रशासनिक हड़ताल में तब्दील हो जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।




