पिछले 10 सालों से धूल फांक रहा दुग्ध प्रशीतन केंद्र, अनिल सुथार ने कलेक्टर जनदर्शन में उठाई आवाज

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले के आदिवासी बहुल डौंडी विकासखंड अंतर्गत आने वाले विधायक आदर्श ग्राम कुसुमकसा में शासकीय तंत्र की घोर अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ लगभग एक दशक पूर्व लाखों रुपये की भारी भरकम लागत से निर्मित ‘दुग्ध प्रशीतन केंद्र’ (मिल्क चिलिंग सेंटर) का भवन और उसमें रखे कीमती उपकरण आज तक चालू नहीं हो सके हैं। रख-रखाव के अभाव में लाखों की मशीनें जंग खा रही हैं और परिसर झाड़ियों में तब्दील हो चुका है। इस स्थिति से व्यथित होकर पूर्व जनपद सदस्य अनिल सुथार ने कलेक्टर जनदर्शन में ज्ञापन सौंपकर बंद पड़े इस केंद्र को तत्काल प्रारंभ करने या भवन को ग्राम पंचायत को हस्तांतरित करने की पुरजोर मांग की है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, वर्ष 2016-17 में डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र के चयनित आदर्श ग्राम कुसुमकसा में बालोद जिले का पहला दुग्ध प्रशीतन केंद्र स्वीकृत किया गया था। निर्माण एजेंसी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) द्वारा ठेकेदार के माध्यम से भवन तैयार कराया गया और डेयरी संचालन के लिए आवश्यक फ्रीजर तथा अन्य आधुनिक उपकरण भी क्रय करके भवन के भीतर रख दिए गए। इतना ही नहीं, करीब छह वर्ष पूर्व लगभग एक लाख रुपये की लागत से परिसर की सुरक्षा के लिए लोहे का गेट और तार फेंसिंग भी कराई गई थी।
हालाँकि, निर्माण के 8 से 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण इस केंद्र में ताला तक नहीं खोला गया है। अंदर रखी मशीनें किस हालत में हैं और कौन-कौन से उपकरण खरीदे गए थे, इसकी स्पष्ट जानकारी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। वर्षों से बंद पड़े रहने के कारण संपूर्ण परिसर में खरपतवार और घास-फूस उग आई है, जिससे शासन के लाखों रुपयों के बजट का खुलेआम दुरुपयोग साफ झलकता है।
पूर्व जनपद सदस्य अनिल सुथार ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि भाजपा के पिछले कार्यकाल में यह योजना स्वीकृत होकर तैयार हुई थी। तत्पश्चात सत्ता परिवर्तन के बाद आए कांग्रेस के 5 वर्षों के शासनकाल में जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इसकी कोई सुध नहीं ली। राज्य में पुनः भाजपा सरकार के गठन के बाद स्थानीय पशुपालकों को उम्मीद जगी थी कि अब यह महत्वाकांक्षी परियोजना धरातल पर उतरेगी और दुग्ध विक्रेताओं को इसका सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। लेकिन वर्तमान सरकार का कार्यकाल आगे बढ़ने के बाद भी विभागीय अधिकारियों की ओर से इसे शुरू करने के लिए कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है। वही बड़ी बड़ी हांकने वाले, होर्डिंग, पोस्टर व बैनरों में खुद की फोटो लगवाने वाले कांग्रेस और भाजपा के जमीन से जुड़े होने का दावा करने वाले नेता इस मामले पर नदारद है।

जिला प्रशासन के जनदर्शन में अपने आवेदन में अनिल सुथार ने स्पष्ट मांग रखी है कि यदि दुग्ध प्रशीतन केंद्र को चालू करना संभव नहीं हो पा रहा है, तो इस निर्मित भवन को खाली कराकर ग्राम पंचायत कुसुमकसा को सौंप दिया जाए। पंचायत को हस्तांतरित होने से इस भवन का उपयोग शासकीय उचित मूल्य (राशन) की दुकान के संचालन अथवा अन्य जनहितकारी सामाजिक कार्यों के लिए किया जा सकेगा, जिससे सरकारी संपत्ति का सही उपयोग संभव हो सकेगा।
स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है जहां वर्तमान जनपद व जिला पंचायत सदस्यों की गैर जिम्मेदारी भी साफ दिखती है। वही जनपद व जिला पंचायत स्तर के अधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर केवल कागजों तक सीमित हैं। एक दशक पूर्व स्वीकृत योजना का लाभ न मिलने से क्षेत्र के गौ-पालक आज भी आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं और शासकीय धन का इस प्रकार बर्बाद होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।




