अविश्वास प्रस्ताव की सुगबुगाहट पर ‘साजिश का चाबुक’? उपसरपंच-पंच की गिरफ्तारी पर भड़के ग्रामीण, उमेश पटेल के नेतृत्व में थाने का घेराव…

रायगढ़। ग्राम सरकार के सियासी दंगल में पुलिसिया कार्रवाई को लेकर तारापुर क्षेत्र में खुला टकराव शुरू हो गया है। तारापुर के उपसरपंच राजीव डनसेना और पंच घनश्याम निषाद की गिरफ्तारी के खिलाफ शुक्रवार को आक्रोश भड़क उठा। खरसिया विधायक उमेश पटेल के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोतरारोड थाने का घेराव कर दिया और पुलिस-प्रशासन पर सत्ता के दबाव में ‘फर्जी मुकदमा’ थोपने का खुला आरोप मढ़ते हुए तत्काल रिहाई की मांग पर अड़ गए।
अविश्वास प्रस्ताव से घबराई कुर्सी, बैकफुट पर आई पुलिस? – मामले की जड़ें पंचायत स्तर के सियासी गणित से जुड़ी हैं। सरपंच डिग्रीलाल सिदार के कार्यकाल में विकास कार्यों की नाकामी और सरकारी योजनाओं के लाभ से जनता के वंचित रहने का आरोप लगाते हुए 20 अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) ने इस पर संज्ञान लेते हुए 10 सितंबर को मतदान की तारीख मुकर्रर कर दी थी। जैसे ही अविश्वास प्रस्ताव की उल्टी गिनती शुरू हुई, समीकरण तेजी से बदले और पुलिस ने 20 अगस्त की तारीख में सरपंच की शिकायत पर एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत उपसरपंच और पंच को सलाखों के पीछे भेज दिया।
15 अगस्त की कथित घटना, 20 को FIR: साज़िश या संयोग? – सरपंच की शिकायत के अनुसार 15 अगस्त को पंचायत भवन में जातिगत गाली-गलौज की गई थी। इस पर गिरफ्तार जनप्रतिनिधियों के पक्ष का सीधा तर्क है कि वे उस दिन पंचायत भवन पहुंचे ही नहीं थे। पांच दिन बाद दर्ज हुई इस शिकायत की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने इसे अविश्वास प्रस्ताव रोकने का सुनियोजित राजनीतिक हथियार करार दिया है।
विधायक उमेश पटेल का सीधा प्रहार : थाने के घेराव के दौरान विधायक उमेश पटेल ने पुलिस तंत्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
“यह गिरफ्तारी कानून का पालन नहीं, बल्कि अविश्वास प्रस्ताव को प्रभावित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कुचलने के लिए किया गया राजनीतिक षड्यंत्र है। राजीव डनसेना एक शिक्षित और जागरूक युवा हैं, जिन्हें दबाने के लिए मनगढ़ंत और झूठे मामले बनाए गए हैं। राजनीतिक आकाओं के इशारे पर पुलिस का यह दुरुपयोग कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
जनप्रतिनिधियों की गिरफ्तारी ने ग्रामीण राजनीति में उबाल ला दिया है। एक तरफ जहां पुलिस इसे नियमानुसार कार्रवाई बता रही है, वहीं ग्रामीणों और कांग्रेस के तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि अविश्वास प्रस्ताव से पहले यह टकराव और तेज होगा।




