कलेक्टर से लगाई गुहार – एसडीएम के पत्र और हाईकोर्ट के स्थगन आदेश का हवाला, फिर भी कब्जा नहीं हटने का आरोप….

जशपुर। जिले के सन्ना क्षेत्र में एक आदिवासी परिवार ने अपनी पैतृक भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित शनिचर उरांव ने कलेक्टर को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उसकी खसरा नंबर 1203, रकबा 13.50 एकड़ पैतृक भूमि में से लगभग 8 एकड़ पर स्थानीय व्यक्ति प्रियांशु केशरी उर्फ ऋषु केशरी द्वारा जबरन कब्जा कर मिर्च की खेती की जा रही है।आवेदन के अनुसार, विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने और विवाद करने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित का कहना है कि इस मामले की शिकायत पहले भी प्रशासन के समक्ष की जा चुकी है, लेकिन अब तक कब्जा नहीं हटाया गया, जिससे परिवार को आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
दस्तावेज़ों के अनुसार, 19 फरवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बगीचा द्वारा तहसीलदार और थाना प्रभारी सन्ना को पत्र जारी कर मामले की जांच करने तथा माननीय हाईकोर्ट, बिलासपुर के स्थगन आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद पीड़ित का आरोप है कि जमीन आज भी कब्जे से मुक्त नहीं कराई गई।अपने आवेदन में पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पूर्व में भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं और कई लोगों की जमीन हड़पने के मामले न्यायालय में लंबित हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
अब पीड़ित ने कलेक्टर से मांग की है कि उसकी पैतृक भूमि को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए और आरोपित के विरुद्ध विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाए।
बड़े सवाल : हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद यदि कब्जा नहीं हटा तो जिम्मेदार कौन? एसडीएम के निर्देशों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रभावशाली लोगों के सामने प्रशासन बेबस है या फिर जांच अभी अधूरी है?
(नोट: खबर में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के आवेदन और उपलब्ध दस्तावेज़ों पर आधारित हैं। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।)
भाग 2 में सारे नाम होंगे जग जाहिर… बने रहें RM24KE साथ




