स्वास्थ्य तंत्र पर बड़ा कलंक : ‘माँ भगवती मेडिकल’ में दवा की आड़ में मौत का काला कारोबार!…

- बिना डॉक्टरी डिग्री के चल रहा था अवैध अस्पताल, सलाइन ड्रिप व पैथोलॉजी लैब; शिकायत के 72 घंटे बाद भी प्रशासनिक अमला मौन…
जशपुर। जिले के थाना पत्थलगांव अंतर्गत बेलडेगी (लुड़ेग मार्ग) में संचालित “माँ भगवती मेडिकल स्टोर” में औषधि विक्रय लाइसेंस की आड़ में चल रहे एक भयंकर और जानलेवा अवैध चिकित्सीय व पैथोलॉजिकल रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार प्रेम सिंह राजपूत एवं ऋषिकेश मिश्रा द्वारा की गई जमीनी जांच और स्टिंग ऑपरेशन में यह सनसनीखेज सच उजागर हुआ कि बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री (MBBS / BAMS / BHMS) के केवल फार्मेसी (D.Pharma / B.Pharma) की आड़ में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।

मौके से मिले रोंगटे खड़े करने वाले सबूत:
- अवैध क्लिनिकल वार्ड: मेडिकल स्टोर के भीतर मरीजों को भर्ती कर इलाज करने हेतु अलग से गुप्त वार्ड, सलाइन (ड्रिप) स्टैंड, बी.पी. मशीन, प्रयुक्त सिरिंज व आपातकालीन दवाएं पाई गईं।
- संक्रामक बायो-मेडिकल वेस्ट: खुले डस्टबिन में प्रयुक्त सिरिंज, खून से सने कॉटन और खाली सलाइन बोतलें भारी मात्रा में पाई गईं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक हैं।
- फर्जी पैथोलॉजी लैब: बिना किसी मान्यता या प्रशिक्षित पैथोलॉजिस्ट के मरीजों का ब्लड/यूरिन सैंपल एकत्रित कर अवैध पैथोलॉजिकल परीक्षण किया जा रहा था।
- ऑन-कैमरा कबूलनामा: उपलब्ध वीडियो साक्ष्य में संचालक स्वयं मरीजों को सलाइन चढ़ाने व इंजेक्शन लगाने की बात सहर्ष स्वीकार कर रहा है।
- जांच रोकने हेतु भीड़ जुटाने का प्रयास: साक्ष्य संकलन के दौरान आरोपी द्वारा असामाजिक तत्वों व भीड़ को उकसाकर जांच टीम को भयभीत करने और साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया गया।
72 घंटे का प्रशासनिक सन्नाटा – साठगांठ की बू : मामले का सबसे गंभीर पहलू प्रशासनिक निष्क्रियता है। पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा द्वारा 29 जुलाई 2026 को ही अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर (जशपुर) श्री पितांबर साहू को फोन पर साक्ष्यों सहित संपूर्ण जानकारी दी गई थी। लेकिन 72 घंटे व्यतीत हो जाने (01 अगस्त 2026) के बाद भी न तो छापामार कार्रवाई हुई, न परिसर सील हुआ और न ही FIR दर्ज की गई।
ऑडियो संवाद का मुख्य अंश (पत्रकार व CMHO जशपुर):
पत्रकार: “सर, 29 तारीख को ड्रग कंट्रोलर पितांबर साहू जी को सारे सबूत दिए गए थे, पर 72 घंटे बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। केवल पैसे का खेल चल रहा लगता है सर!”
CMHO जशपुर: “मैं आज शनिवार को फील्ड में हूँ। सोमवार को ऑफिस का मेल चेक करवाकर आगे जांच करवाता हूँ…”
यह ढुलमुल रवैया सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही और संरक्षण की ओर इशारा करता है।
कानूनी शिकंजा व 5-सूत्रीय त्वरित मांगें : शिकायतकर्ता प्रेम सिंह राजपूत ने कलेक्टर, एसपी, स्वास्थ्य मंत्री और ड्रग कमिश्नर को पत्र भेजकर निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- तत्काल FIR व गिरफ्तारी : थाना पत्थलगांव में BNS (भारतीय न्याय संहिता) की सुसंगत धाराओं (मानव जीवन संकट में डालना, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करना) के तहत प्राथमिकी दर्ज हो।
- तत्काल परिसर सीलिंग : संयुक्त दल गठित कर मेडिकल स्टोर, अवैध क्लीनिक व लैब को सील किया जाए।
- ड्रग लाइसेंस रद्द : लाइसेंस की शर्तों के घोर उल्लंघन हेतु मेडिकल लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जाए।
- लापरवाह अफसरों पर जांच : 72 घंटे तक मूकदर्शक बने रहने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच कर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
- जिलेव्यापी विशेष अभियान : पूरे जशपुर जिले में मेडिकल दुकानों की आड़ में चल रहे फर्जी अस्पतालों पर बुलडोजर कार्रवाई/सीलिंग अभियान चलाया जाए।
अल्टीमेटम : यदि प्रशासन और पुलिस तंत्र तुरंत कड़ा रुख नहीं अपनाता, तो जनहित में माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका दायर की जाएगी।




