रायगढ़

स्कूली छात्राओं को ‘कबाड़’ साइकिल बांटने पर घमासान: घटिया गुणवत्ता का विरोध करने पर युवा नेता को भेजा जेल!…

रायगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार की ‘सरस्वती साइकिल योजना’ के तहत स्कूली छात्राओं को बांटी जा रही साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकारी दावों के विपरीत, छात्राओं को दी जा रही साइकिलों की हालत इतनी खराब बताई जा रही है कि वे हाथ में थमाते ही कबाड़ साबित हो रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सत्ता या प्रशासन की खामियों पर सवाल उठाना अब अपराध बन चुका है?

विरोध की आवाज दबाने का आरोप : रवि भगत को जेल भेजा – लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र के सुखवासनी में साइकिल वितरण कार्यक्रम के दौरान जब भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व युवा आयोग अध्यक्ष रवि भगत ने घटिया साइकिलों के वितरण का विरोध किया और बिल-रसीद मांगने की बात कही, तो प्रशासन ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

बड़ा सवाल : अगर साइकिल वितरण में कोई धांधली या घपला नहीं हुआ था, तो प्रशासन ने बिल-रसीद सार्वजनिक क्यों नहीं की? पारदर्शी जांच कराने के बजाय आवाज उठाने वाले नेता को जेल भेजना किस बात की ओर इशारा करता है?

जन प्रतिनिधियों की चुप्पी और आंखों पर ‘पट्टी’ – साइकिल वितरण कार्यक्रमों में बड़े-बड़े जनप्रतिनिधियों को मुख्य अतिथि बनाकर बुलाया जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिन साइकिलों के टायर में हवा तक ठीक से नहीं टिकती, उन्हें वे अपने हाथों से बच्चों को बांट देते हैं और उनकी दुर्दशा पर एक शब्द नहीं बोलते।

  • कबाड़ में बदलती योजना: करोड़ों रुपये के बजट से चलने वाली यह महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है।
  • निजी कंपनियों का खेल: आरोप हैं कि टेंडर में शर्तें और कंपनियां बदल-बदल कर घटिया गुणवत्ता की साइकिलें सप्लाई की जा रही हैं, जिसकी शिक्षा विभाग द्वारा सही जांच तक नहीं की जाती।

इस पूरे प्रकरण से उठे 5 गंभीर सवाल :

  • निष्पक्ष जांच कब?: क्या छात्राओं को बांटी गई इन साइकिलों की गुणवत्ता की कोई स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाएगी?
  • पारदर्शिता कहां है?: साइकिलों की खरीद प्रक्रिया, टेंडर के नियम और बिल-रसीद सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
  • लापरवाहों पर गाज कब?: यदि साइकिलें घटिया पाई जाती हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार अफसरों और सप्लाई करने वाली कंपनियों पर क्या कार्रवाई होगी?
  • अधिकारों पर प्रहार?: क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अब अपराध माना जाएगा?
  • जवाबदेही किसकी?: क्या पुलिस-प्रशासन का काम निष्पक्ष जांच करना है या सिर्फ विरोध करने वालों को जेल भेजना?

​लोकतंत्र में जनता का विश्वास कायम रखने का सबसे मजबूत आधार पारदर्शिता और जवाबदेही है। शासन और प्रशासन को चाहिए कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सच सामने लाए। यदि साइकिलों की गुणवत्ता में गड़बड़ी है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, न कि सवाल पूछने वालों की आवाज दबाई जाए।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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