“मुस्कुराइए, आप रायगढ़ के ‘गैस चैंबर’ में हैं!” जहाँ पर्यावरण मंत्री के राज में अग्रोहा स्टील बांट रहा अस्थमा का ‘फ्री लाइफटाइम सब्सक्रिप्शन’…

रायगढ़। अगर आप रायगढ़ में हैं, तो कृपया एक गहरी सांस लें… और फिर जोर से खांसते हुए अपनी छाती सहलाएं। क्यों? क्योंकि “आप रायगढ़ में हैं!” यह वो ‘अद्भुत, अलौकिक और चमत्कारी’ जिला है, जहाँ के माननीय विधायक महोदय खुद राज्य के ‘पर्यावरण मंत्री’ हैं। अब जब मंत्री जी खुद पर्यावरण के रक्षक हैं, तो यहाँ के उद्योगपतियों ने भी पर्यावरण को ‘संरक्षित’ करने की एक अनोखी जिम्मेदारी उठा ली है।
इसी क्रम में ‘अग्रोहा स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड’ ने ग्राम पंचायत लाखा के चिरईपानी में विकास का ऐसा नायाब और ‘पारदर्शी’ मॉडल पेश किया है, जिसे देखकर खुद पर्यावरण मंत्रालय भी शर्म से राख-राख हो जाए। ‘चिराग तले अंधेरा’ तो आपने सुना होगा, लेकिन यहाँ तो ‘मंत्री जी के आंगन में ही धुंआ-धुंआ’ चल रहा है! आइए, विस्तार से समझते हैं अग्रोहा स्टील की इस ‘राख-लीला’ को।
‘पार्किंग’ के नाम पर ‘राख-महल’ का शिलान्यास – इस ‘महाघोटाले’ और पर्यावरण के चीरहरण की पटकथा इसी साल 29 जनवरी 2026 को लिखी गई। ग्राम पंचायत लाखा ने अपनी भोली-भाली नीयत से खसरा नंबर 01 की 3 एकड़ शासकीय भूमि अग्रोहा प्लांट को दी। शर्त बस इतनी सी थी कि इस जमीन का इस्तेमाल केवल ‘भारी वाहनों की पार्किंग’ के लिए होगा।
लेकिन अग्रोहा प्रबंधन की कॉर्पोरेट दृष्टि पंचायत से सौ गुना आगे थी:
- ट्रक नहीं, राख पार्क करेंगे : कंपनी ने सोचा, “खाली ट्रक खड़े करके विकास कैसे दिखेगा? चलो, यहाँ ‘विकास का एक खूबसूरत राख का पहाड़’ बनाते हैं!”
- पेड़ों का ‘मुंडन संस्कार’ : रातों-रात 3 एकड़ में फैले ‘छोटे झाड़ के जंगल’ का मुंडन कर दिया गया। आखिर हरे पेड़ क्या ही काम आते हैं? ऑक्सीजन तो अब अस्पतालों में सिलेंडर में भी आसानी से मिल जाती है!
- कब्जा-ए-खास : पेड़ों की बलि चढ़ाने के बाद, वहां जालीदार तार की फेंसिंग कर दी गई और सरकारी जमीन को ऐसे निगल लिया गया जैसे कोई भूखा अजगर मेढ़क को डकार जाता है।
सरपंच का कड़क नोटिस या ‘भेलपूरी का दोना’? – जब गांव वालों की आंखें खुलीं और उन्हें समझ आया कि पार्किंग के नाम पर उनके साथ ‘राख का खेल’ हो गया है, तो पंचायत का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
- प्रस्ताव निरस्त : भारी आक्रोश के बीच 18 अप्रैल 2026 को हुई ग्राम सभा में जमीन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से कचरे के डिब्बे में डाल दिया गया।
- नोटिस की अनदेखी : इसके बाद 7 मई 2026 को सरपंच इन्द्र कुमार पंडा ने फुल फॉर्म में आते हुए कंपनी के उद्योग प्रबंधक को एक कड़क लीगल नोटिस थमाया “तत्काल राख हटाओ, काटे गए पेड़ों की भरपाई करो, और जालीदार बाउंड्री उखाड़ो, वरना कानूनी कार्रवाई झेलने के लिए तैयार रहो!”
लेकिन अग्रोहा प्रबंधन ठहरा ‘रसूखदार कंपनी बहादुर’। ऐसा लगता है उन्होंने पंचायत के इस कड़े नोटिस का इस्तेमाल या तो भेलपूरी खाने के लिए किया या फिर उसे रद्दी के भाव तौल दिया। आखिर पर्यावरण मंत्री के ही जिले में एक अदनी सी पंचायत की इतनी जुर्रत कि वो ‘विकास की राख’ उड़ाने वालों से सवाल करे?
हवाओं में ‘विटामिन-ऐश’ और घर-घर ‘अस्थमा योजना’ – कंपनी के इस ‘विकास’ का असर अब जमीनी स्तर पर बड़ी ही खूबसूरती से दिखने लगा है:
- खेतों का ‘सौंदर्यीकरण’ (बर्बादी) : अब गांव के खेतों में हरी-भरी फसलों की जगह फ्लाई ऐश की ‘सफेद बर्फ’ गिर रही है। चिरईपानी के किसानों को स्विट्जरलैंड जाने की क्या जरूरत, जब उन्हें अपने ही खेतों में मुफ्त ‘राख-बारी’ (बर्फबारी) का मजा मिल रहा है! उपजाऊ जमीन अब बंजर होने का जश्न मना रही है।
- फेफड़ों की ‘डस्टिंग’ (स्लो पॉइजन) : हवा में उड़ता यह फ्लाई ऐश (राख) सीधे गांव वालों के फेफड़ों तक पहुंच रहा है। कंपनी गांव के बच्चों और बुजुर्गों को अस्थमा, टीबी और सांस की गंभीर बीमारियों का ‘फ्री प्रीमियम पास’ बांट रही है। गांव वालों में दहशत है, लेकिन कंपनी अपनी राख की रोटियां सेंकने में मस्त है।
कलेक्टर दरबार में गुहार : क्या जागेगा ‘कुंभकर्णी’ प्रशासन? – पर्यावरण मंत्री के अभेद्य किले में जब पर्यावरण की दिनदहाड़े हत्या हो रही हो, तब त्रस्त ग्रामीण अपनी ‘मुफ्त की बीमारियों’ और बंजर होती जमीन की शिकायत लेकर सोमवार को जनदर्शन में रायगढ़ कलेक्टर के दरबार में पहुंच गए। उन्हें अब भी इस बात की गलतफहमी है कि इस ‘राख के राज’ में प्रशासन नाम की कोई संस्था जिंदा है, जो उनकी सांसों की कीमत समझेगी।
चूंकि मामला 3 एकड़ सरकारी जमीन डकारने और सैकड़ों जिंदगियों के फेफड़ों को ‘राख’ करने का है, तो जांच अगर गहराई से हुई, तो कई बड़े सफेदपोशों के चेहरों पर लगी काली राख साफ हो सकती है।
अब पूरे जिले की निगाहें रायगढ़ कलेक्टर पर टिकी हैं। देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या जिला प्रशासन इन उद्योगपतियों के खिलाफ बुलडोजर चलाने की हिम्मत जुटा पाता है, या फिर “मुस्कुराइए, आप रायगढ़ में हैं” का बोर्ड लगाकर ग्रामीणों को यूं ही राख फांकने और घुट-घुट कर मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा!




