किसानों के हक पर 68 लाख का डाका : CM साय का चला हंटर, खाद की कालाबाजारी करने वाले अफसर पर गिरी गाज!…

सरगुजा। छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन’ का मतलब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, यह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट कर दिया है। चिरमिरी के तानसेन भवन में कोरिया, एमसीबी और सूरजपुर जिलों की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री का सख्त तेवर देखने को मिला। किसानों के हक की खाद डकारने वाले भ्रष्टाचारियों पर सीएम साय ने ऐसा हंटर चलाया है कि पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
कोरिया जिले की जिल्दा सहकारी समिति में खाद की कालाबाजारी और भयंकर लापरवाही के मामले में मुख्यमंत्री ने सहकारिता विभाग के सहायक पंजीयक आयुष प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही कलेक्टर को दो टूक निर्देश दिए हैं कि इस महाघोटाले में शामिल किसी भी सफेदपोश या बिचौलिए को बख्शा न जाए।
एक नजर में घोटाले का काला सच :
- घोटाले की कुल रकम: 68 लाख रुपये
- गायब खाद की मात्रा: 246.75 मीट्रिक टन
- शिकायतकर्ता: रामप्रताप साहू (ग्राम जिल्दा का जागरूक किसान)
- तत्काल एक्शन: सहायक पंजीयक सस्पेंड, सभी जिम्मेदारों पर कार्रवाई के निर्देश।
कैसे खुला भ्रष्टाचार का यह बदबूदार खेल? – किसानों के खेतों में हरियाली लाने के लिए जो यूरिया और डीएपी सरकार भेज रही थी, उसे भ्रष्ट तंत्र बिचौलियों के हाथों ऊंचे दामों में नीलाम कर रहा था। इस गोरखधंधे का पर्दाफाश तब हुआ, जब जनसमस्या निवारण शिविर में ग्राम जिल्दा के किसान रामप्रताप साहू ने अपनी हिम्मत दिखाते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई।
किसान की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 13 मई को कलेक्टर के निर्देश पर एक जांच दल (उर्वरक निरीक्षक पुष्पा ठाकुर और नायब तहसीलदार पोड़ी-बचरा) गठित किया गया। जब इस टीम ने गोदाम का भौतिक सत्यापन किया, तो जो सच सामने आया उसने सिस्टम की पोल खोल कर रख दी।
कागजों में खाद, गोदाम से गायब!
ऑनलाइन रिकॉर्ड चीख-चीख कर कह रहे थे कि गोदाम में 431.55 मीट्रिक टन उर्वरक होना चाहिए, लेकिन जब जांच टीम ने जमीन पर गिनती की, तो मौके पर सिर्फ 184.80 मीट्रिक टन खाद ही मिली। रातों-रात 246.75 मीट्रिक टन खाद (कीमत लगभग 68 लाख रुपये) हवा में गायब हो गई!
सीएम का स्पष्ट संदेश: भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं – सुशासन तिहार के इस मंच से मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि अन्नदाताओं के साथ धोखा करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। 68 लाख रुपये के इस खाद घोटाले में अब प्रशासन की रडार पर वो तमाम चेहरे हैं, जिन्होंने किसानों के पसीने की कमाई पर डाका डाला है।
इस कड़ी कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के भ्रष्ट अधिकारियों को एक कड़ा संदेश दे दिया है – “किसानों के हक से खिलवाड़ किया, तो कुर्सी और नौकरी दोनों से हाथ धोना पड़ेगा।”

