अस्पताल बना ‘अय्याशी’ का अड्डा? सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले जेल प्रहरी पर गिरी गाज, सेवा से बर्खास्त…

अंबिकापुर। सेंट्रल जेल प्रशासन ने सुरक्षा में सेंध लगाने वाले और अनुशासनहीनता की हदें पार करने वाले जेल प्रहरी जयप्रकाश कुजूर के खिलाफ बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। जेल अधीक्षक अक्षय प्रताप सिंह राजपूत ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रहरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का फरमान जारी कर दिया है। यह कार्रवाई अस्पताल के जेल वार्ड में मिली गंभीर खामियों और नियमों की धज्जियाँ उड़ाने के बाद की गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने खोली पोल – मामले का खुलासा शनिवार को तब हुआ जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो ‘बम’ की तरह फटा। वीडियो में साफ देखा गया कि जेल वार्ड में भर्ती एक बंदी के परिजन प्रतिबंधित सामग्री के साथ बेधड़क अंदर-बाहर कर रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होते ही जेल महकमे में हड़कंप मच गया और अधीक्षक ने खुद मोर्चा संभालते हुए वार्ड का औचक निरीक्षण किया।
डबल लॉक सिस्टम का उड़ाया मजाक – अस्पताल के जेल वार्ड से पिछले एक साल में तीन कैदियों के फरार होने के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। नियम था कि गेट पर दो ताले लगेंगे:
- भीतरी ताला : चाबी जेल प्रहरी के पास।
- बाहरी ताला : चाबी मेडिकल स्टाफ के पास।
लेकिन जांच में जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला था। प्रहरी जयप्रकाश कुजूर के पास मेडिकल स्टाफ की भी चाबी मिली। यानी सुरक्षा की वह ‘दीवार’ जिसे अभेद्य होना था, उसे खुद प्रहरी ने ही ढहा दिया था। निरीक्षण के दौरान गेट का ताला भी खुला पाया गया, जो सीधे तौर पर कैदियों को भागने का न्योता देने जैसा था।
अटेंडेंट की आड़ में रची गई लापरवाही की स्क्रिप्ट – वार्ड में 62 वर्षीय सजायाफ्ता बंदी हरबख्श सिंह छाबड़ा 23 मार्च से भर्ती है। स्वास्थ्य कारणों से उसे एक अटेंडेंट रखने की अनुमति मिली थी, लेकिन प्रहरी ने इस रियायत को ‘लापरवाही का लाइसेंस’ बना लिया। अटेंडेंट की आड़ में प्रतिबंधित वस्तुओं की एंट्री कराई गई और सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया गया।
“सुरक्षा में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जेल प्रहरी ने न केवल नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि विभाग की साख को भी खतरे में डाला। यह बर्खास्तगी उन सभी के लिए सबक है जो अपनी ड्यूटी को हल्के में लेते हैं।”
अक्षय प्रताप सिंह राजपूत, अधीक्षक, सेंट्रल जेल




