विशेष रिपोर्ट : भारतमाला प्रोजेक्ट के ‘रक्तबीज’, कैसे एक SDM और दलालों के सिंडिकेट ने निगला विकास का पैसा?…

रायपुर। विशेष संवाददाता। विकास की रफ्तार को पंख देने वाली केंद्र सरकार की ‘भारतमाला परियोजना’ छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण के लिए हुए भूमि अधिग्रहण में एक ऐसा ‘मुआवजा सिंडिकेट’ सक्रिय था, जिसने कलम की एक नोक से सरकारी खजाने में ₹43 करोड़ का छेद कर दिया। इस महाघोटाले के मुख्य किरदार और लंबे समय से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे निलंबित SDM निर्भय साहू अब सलाखों के पीछे हैं।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम : फरारी से रिमांड तक – निलंबित SDM निर्भय साहू की गिरफ्तारी साधारण नहीं थी। आरोपी की जमानत याचिका देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी थी। विशेष न्यायालय से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद साहू पुलिस को छका रहा था। अंततः EOW (आर्थिक अपराध शाखा) ने घेराबंदी कर उसे दबोचा और कोर्ट ने उसे 30 मार्च तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब रिमांड के दौरान भ्रष्टाचार की उन परतों को खोला जाएगा, जो फाइलों के नीचे दबी थीं।
घोटाले की ‘मोडस ऑपरेंडी’ : ऐसे बदला गया भूगोल – जांच एजेंसियों (ED और EOW) की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं हैं:
- बैकडेटिंग का खेल : SDM ने अपने अधीनस्थ पटवारी और राजस्व निरीक्षकों के साथ मिलकर ग्राम नायकबांधा, उगेटरा, उरला, भेलवाडीह और टोकरो की जमीनों के रिकॉर्ड को बैकडेट (पुरानी तारीख) में बदला।
- जमीन के टुकड़े, करोड़ों के वारे-न्यारे : बड़ी जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों (करीब 159 खसरे) में विभाजित कर दिया गया। नियम यह है कि छोटे टुकड़ों का मुआवजा दर बड़े भूखंड से अधिक होता है। इस ‘सर्जरी’ से ₹29.5 करोड़ का वास्तविक मुआवजा रातों-रात ₹70 करोड़ के पार पहुंच गया।
- मुआवजे का ‘पुनर्जन्म’ : जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि जो जमीनें शासन द्वारा पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी थीं, उन्हें कागजों पर फिर से ‘नया’ दिखाकर दोबारा मुआवजा निकाल लिया गया।
ED की स्ट्राइक : ₹23.35 करोड़ की संपत्ति ‘जब्त’ – गिरफ्तारी से ठीक एक दिन पहले सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस घोटाले के वित्तीय तंत्र पर प्रहार किया। ED ने ₹23.35 करोड़ की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है।
जांच का बिंदु : ED के मुताबिक, मुख्य आरोपी जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा और उसके सहयोगियों ने लगभग ₹27.05 करोड़ का गबन किया था। इसमें से अधिकांश हिस्सा अब सरकारी कब्जे में है।
‘चेक’ और ‘सिग्नेचर’ का मायाजाल : यह घोटाला केवल कागजों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें मनी लॉन्ड्रिंग का गहरा जाल था:
- दलालों ने गरीब और अनपढ़ जमीन मालिकों के नाम पर कई बैंक खाते खुलवाए।
- मुआवजे की करोड़ों की राशि इन खातों में जमा कराई गई।
- आरोपियों ने पहले से ही जमीन मालिकों से साइन किए हुए ब्लैंक चेक और बैंक दस्तावेज ले लिए थे।
- जैसे ही पैसा खाते में आया, उसे तुरंत मुख्य आरोपियों के निजी खातों में ट्रांसफर कर लिया गया। असली जमीन मालिकों को ‘चुप्पी’ साधे रखने के लिए महज एक मामूली हिस्सा दिया गया।
पारिवारिक रिश्तों का ‘भ्रष्ट’ गठबंधन : घोटाले की जड़ें पारिवारिक रिश्तों तक फैली हैं। मुख्य आरोपी हरमीत सिंह खनूजा ने अपनी पहली पत्नी को तलाक देकर तहसीलदार रविंदर कौर (हरमीत सिंह चावला की बेटी) से शादी की थी। ED को खनूजा के ससुर हरमीत सिंह चावला के पास से भी अवैध लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं। यह प्रशासनिक रसूख और भू-माफिया के बीच के अपवित्र गठबंधन का सबसे बड़ा उदाहरण है।
प्रशासनिक गाज और वर्तमान स्थिति : इस मामले में सरकार ने अब तक सख्त रुख अपनाया है –
- निलंबन : जगदलपुर निगम कमिश्नर रहे निर्भय साहू और कोरबा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है।
- कुल घोटाला : कागजों पर ₹43 करोड़ से अधिक की हेराफेरी दिखाई गई है, जिसमें से ₹78 करोड़ के भुगतान को फिलहाल प्रशासन ने रोक दिया है।
विकास की राह में भ्रष्टाचार का रोड़ा : भारतमाला परियोजना जैसे राष्ट्रव्यापी प्रोजेक्ट में इस तरह की सेंधमारी न केवल सरकारी खजाने की हानि है, बल्कि यह उन किसानों के साथ भी विश्वासघात है जिनकी जमीनें देश की प्रगति के लिए ली गई हैं। अब सबकी नजरें 30 मार्च तक चलने वाली पुलिस रिमांड पर हैं, जहाँ निर्भय साहू के कबूलनामे से कई और ‘सफेदपोशों’ के बेनकाब होने की उम्मीद है।




