हक की जंग या अंगारों पर चलते सपने? रायपुर में सहायक शिक्षक अभ्यर्थियों का ‘अग्निपथ’…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी का तूता धरना स्थल बुधवार को एक रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। पिछले 57 दिनों से सहायक शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे डीएड (D.Ed) अभ्यर्थियों का सब्र अब जवाब दे चुका है। अपनी मांगों की अनदेखी से आक्रोशित इन युवाओं ने बुधवार को न केवल ‘अंगारों’ पर चलकर अपना विरोध दर्ज कराया, बल्कि पुलिसिया कार्रवाई और वाटर कैनन की बौछारों का भी सामना किया।
प्रमुख घटनाक्रम : जब सिस्टम की बेरुखी ने झोंका आग में – अपनी सुध लिए जाने के इंतजार में बैठे इन आदिवासी अभ्यर्थियों ने विरोध का ऐसा रास्ता चुना जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर इन युवाओं ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे व्यवस्था की बेरुखी से ज्यादा पीड़ा सह रहे हैं।
- पुलिस से झड़प और लाठीचार्ज : प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब बिगड़ गई जब अभ्यर्थियों और पुलिस बल के बीच तीखी धक्का-मुक्की शुरू हुई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
- घायल अभ्यर्थी : इस संघर्ष में 4 अभ्यर्थी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वाटर कैनन की मार और अफरा-तफरी के बीच दो युवतियां बेहोश हो गईं।
- संवेदनहीनता की पराकाष्ठा : मौके पर करीब एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। साथी अभ्यर्थी अपनी घायल सहेलियों को कंधों पर उठाकर अस्पताल की ओर भागने लगे। अंततः मीडिया टीम (लल्लूराम डॉट कॉम) ने अपनी गाड़ी से उन्हें अभनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। फिलहाल दोनों युवतियां खतरे से बाहर हैं।
न्याय की गुहार : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी खाली हाथ – यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। इसके पीछे एक लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई है:
- अदालती आदेश : अभ्यर्थियों का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद उन्हें नियुक्तियां नहीं दी जा रही हैं।
- दिसंबर से अनशन : 24 दिसंबर से ये अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं।
- पत्राचार विफल : इससे पहले राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री तक स्पीड पोस्ट के जरिए हस्तक्षेप की गुहार लगाई जा चुकी थी, लेकिन परिणाम शून्य रहा।
जेल भरो आंदोलन और वर्तमान स्थिति : प्रदर्शन के उग्र होने के बाद पुलिस ने बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल भेज दिया है। रायपुर का तूता इलाका वर्तमान में पुलिस छावनी बना हुआ है, लेकिन अभ्यर्थियों के चेहरों पर डर के बजाय व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश साफ नजर आ रहा है।
“क्या लोकतंत्र में अपनी जायज मांगों के लिए अंगारों पर चलना ही एकमात्र विकल्प रह गया है?” – यह सवाल आज छत्तीसगढ़ के गलियारों में गूंज रहा है।




