राजस्व विभाग में बड़ा खेल : SDM की मिलीभगत से पूर्वजों की जमीन दूसरे के नाम, किसान अब दर-दर भटकने को मजबूर…

सारंगढ़-बिलाईगढ़: जिले के ग्राम गोविन्दवन में भूमि विवाद का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक तत्कालीन राजस्व अधिकारी ने मिलीभगत कर किसानों की पुश्तैनी जमीन और सरकारी जमीन को कागजों में हेरफेर कर किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर दिया। अब पीड़ित किसान न्याय के लिए कलेक्टर की चौखट और उच्च न्यायालय के चक्कर काट रहे हैं।

50 साल का कब्जा, एक कलम की नोक पर खत्म : पीड़ित आवेदक दफ्तर सिंह, कमलादेवी और जितेन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि वे पिछले 50 से अधिक वर्षों से अपनी जमीन पर काबिज हैं और खेती कर रहे हैं। उनके पास जमीन के पक्के दस्तावेज और पूर्वजों के समय से चली आ रही ‘ऋण पुस्तिका’ (किसान किताब) भी मौजूद है। लेकिन आरोप है कि 24 दिसंबर 2018 को तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (SDM) श्री के. एल. सोरी ने आवेदकों को बिना किसी सूचना दिए, फर्जी तरीके से उनकी मालिकाना हक वाली जमीन और शासन की सुरक्षित जमीन को ओंकारेश्वर शरण सिंह के नाम दर्ज कर दिया।
बलपूर्वक कब्जा और पुलिस का खौफ : शिकायत के अनुसार, जमीन का नाम बदलने के बाद ओंकारेश्वर शरण सिंह अब दल-बल के साथ खेतों पर कब्जा कर धान की बुवाई कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि जब वे अपनी जमीन बचाने की कोशिश करते हैं, तो विपक्षी द्वारा उनके खिलाफ थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी जाती है, जिससे वे अपने ही खेत में जाने से डर रहे हैं।
विवादित जमीन का लेखा-जोखा : दस्तावेजों के अनुसार, विवाद के घेरे में कई खसरा नंबर शामिल हैं –
- सरकारी जमीन : खसरा नंबर 71/1, 392/1, 392/2, 402/1 और 1150/1 सहित कुल 6.6430 हेक्टेयर भूमि।
- निजी भूमि : दफ्तर सिंह की 3.188 हेक्टेयर और कमलादेवी की 3.630 हेक्टेयर भूमि पर हक जताया गया है।
उच्च न्यायालय का स्टे, फिर भी धान बेचने की कोशिश : पीड़ितों ने इस अन्याय के खिलाफ बिलासपुर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व मण्डल रायपुर को सुनवाई का निर्देश दिया और जमीन पर ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है। इसके बावजूद, आवेदकों का आरोप है कि विपक्षी द्वारा उस विवादित जमीन पर धान का अवैध पंजीयन कराकर उसे मंडी में बेचने की कोशिश की जा रही है।
कलेक्टर से गुहार : “एग्रीटेक और पंजीयन निरस्त हो” -हाल ही में ‘जनदर्शन’ में सौंपे गए आवेदन के माध्यम से किसानों ने कलेक्टर से मांग की है कि:
- ओंकारेश्वर शरण सिंह के नाम पर किए गए धान बिक्री पंजीयन और एग्रीटेक को तत्काल निरस्त किया जाए।
- राजस्व रिकॉर्ड में हुई इस कथित धोखाधड़ी की उच्च स्तरीय जांच हो।
- किसानों को उनकी जमीन पर शांतिपूर्ण ढंग से खेती करने का अधिकार वापस दिलाया जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस रसूखदार गठजोड़ पर क्या कार्यवाही करता है या पीड़ित किसान इसी तरह न्याय के लिए भटकते रहेंगे।




