खाकी की धौंस और उगाही पर रायगढ़ एसएसपी का बड़ा एक्शन : झूठे केस में फंसाने की धमकी देने वाले लैलूंगा थाने के दो आरक्षक सस्पेंड, डीएसपी को 5 दिन में जांच के निर्देश…

रायगढ़। जिले के लैलूंगा थाने में पदस्थ दो आरक्षकों की मनमानी, उगाही और प्रताड़ना के खिलाफ उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह ने सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। खाकी वर्दी का रौब दिखाकर एक निर्दोष नागरिक से पैसों की मांग करने, उसे प्रताड़ित करने और मांग पूरी न होने पर झूठे केस में फंसा देने की धमकी देने के गंभीर मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए दोनों आरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। एसएसपी की इस बेलाग कार्रवाई से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
मामला सरगुजा जिले के गहिला कोठ निवासी चंदन दास की शिकायत से जुड़ा हुआ है। पीड़ित ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि लैलूंगा थाने में पदस्थ आरक्षक क्रमांक 865 विजय कुशवाहा और आरक्षक क्रमांक 74 सूरज प्रकाश भगत (सूरजनाथ) द्वारा उस पर लगातार अनुचित दबाव बनाया जा रहा था। आवेदन में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि दोनों आरक्षक उससे अवैध रूप से पैसों की मांग कर रहे थे और बात न मानने पर उसे झूठे और संगीन मामलों में फंसाकर जेल भेजने का डर दिखा रहे थे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने मामले के तमाम बिंदुओं का अवलोकन करते हुए पाया कि दोनों आरक्षकों का कृत्य प्रथम दृष्टया अत्यंत गंभीर प्रकृति, घोर अनुशासनहीनता और पदीय दायित्वों के सर्वथा विपरीत है। जनता की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा ही आम नागरिक का शोषण किए जाने को कदाचरण मानते हुए उन्होंने आरक्षक विजय कुशवाहा और आरक्षक सूरज प्रकाश भगत को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश के तहत निलंबन अवधि के दौरान दोनों आरक्षकों का मुख्यालय रक्षित केंद्र (पुलिस लाइन), रायगढ़ नियत किया गया है और उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) सुशांतो बनर्जी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। एसएसपी कार्यालय द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि डीएसपी मुख्यालय प्रकरण से जुड़े सभी तथ्यों, बयानों और सुसंगत साक्ष्यों की गहन प्राथमिक जांच कर 05 दिनों के भीतर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे। यदि जांच रिपोर्ट में आरक्षकों के खिलाफ लगाए गए आरोप पुष्ट होते हैं, तो उनके विरुद्ध विभागीय जांच बैठाते हुए कठोर वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।




