रायगढ़ प्रशासन की ऐतिहासिक धमक : ‘पंचायत समाधान मंच’ ने बिना विवाद सुलझाया वर्षों पुराना विवाद, 27,705 वर्गफीट सरकारी जमीन आजाद…

रायगढ़। प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जन-संवाद का यदि सही तालमेल हो, तो बड़ी से बड़ी बाधाएं भी स्वतः समाप्त हो जाती हैं। तहसील पुसौर के ग्राम बोंदाटिकरा में आज जिला प्रशासन ने इसकी एक जीवंत मिसाल पेश की। प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए नाले और शासकीय भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को मुक्त कराया है। इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यह पूरी कार्रवाई बिना किसी विरोध और बल प्रयोग के, केवल संवाद और आपसी सहमति के आधार पर संपन्न हुई।
पंचायत समाधान मंच : विवाद से विश्वास का सफर – ग्राम बोंदाटिकरा में पिछले लंबे समय से शासकीय भूमि और प्राकृतिक नाले पर अतिक्रमण की शिकायतें जिला प्रशासन को मिल रही थीं। एसडीएम रायगढ़ के निर्देश पर इस संवेदनशील मामले को ‘पंचायत समाधान मंच’ के सुपुर्द किया गया। प्रशासन ने पारंपरिक ‘बुलडोजर संस्कृति’ के बजाय पहले समझाइश का रास्ता चुना।
राजस्व अधिकारियों ने अतिक्रमणकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं और उन्हें सार्वजनिक हित तथा कानूनी जटिलताओं से अवगत कराया। प्रशासन की इस ‘गांधीवादी’ पहल का असर यह हुआ कि वर्षों से जमीन पर काबिज लोगों ने स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने पर अपनी सहमति दे दी।
राजस्व अमले की संयुक्त कार्रवाई : आंकड़ों में बड़ी सफलता – आज तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम भारी लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुँची और सीमांकन के पश्चात विधिवत कार्रवाई शुरू की। देखते ही देखते 27,705 वर्गफीट शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया।
कार्रवाई का विस्तृत विवरण : प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, निम्नलिखित लोगों के कब्जों को हटाया गया :
- देवप्रसाद पिता ठगवा : सबसे बड़ा अतिक्रमण (24,757 वर्गफीट) इन्हीं के पास था।
- पैत राम पिता घसिया : 1,680 वर्गफीट भूमि मुक्त कराई गई।
- परसेदिन : 322 वर्गफीट।
- डमरू पिता प्रिंजलाल : 269 वर्गफीट।
- जयलाल एवं सुशील कुर्रे : क्रमशः 258-258 वर्गफीट (कुल 516 वर्गफीट)।
- तिहारू पिता जेठू : 161 वर्गफीट।
विकास की राह हुई प्रशस्त – अतिक्रमण मुक्त कराई गई इस भूमि में एक बड़ा हिस्सा नाले का था। नाले पर अतिक्रमण होने के कारण जल निकासी बाधित हो रही थी, जिससे बरसात के दिनों में गांव में जलभराव की स्थिति निर्मित होती थी। अब इस भूमि के मुक्त होने से न केवल जल निकासी सुधरेगी, बल्कि इस विशाल भूखंड का उपयोग सामुदायिक भवनों, खेल मैदान या अन्य सार्वजनिक विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा।
अधिकारियों का संदेश : ‘सहयोग करें, अतिक्रमण न करें’ – इस सफल अभियान के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ‘पंचायत समाधान मंच’ भविष्य में भी विवादों के निपटारे का मुख्य केंद्र बना रहेगा। प्रशासन का लक्ष्य दंडात्मक कार्रवाई से ज्यादा नागरिकों में जागरूकता लाना है। बोंदाटिकरा की यह सफलता अब जिले के अन्य गांवों के लिए एक ‘रोल मॉडल’ बन गई है।
बोंदाटिकरा की जनता में हर्ष : ग्रामीण प्रशासन की इस पहल की सराहना कर रहे हैं, क्योंकि जो काम सालों से फाइलों में दबा था, उसे प्रशासन ने धरातल पर चंद दिनों के संवाद से सच कर दिखाया।




