रायगढ़

महा-अभियान : रायगढ़ जिला प्रशासन का ‘मिशन समाधान’ ; 01 अप्रैल से राजस्व पखवाड़े के जरिए जमीनी विवादों का होगा अंत…

रायगढ़ | विशेष कवरेज | 30 मार्च 2026 छत्तीसगढ़ के प्रमुख औद्योगिक और कृषि प्रधान जिले रायगढ़ में अब “फाइलें नहीं, अधिकारी चलेंगे” की अवधारणा साकार होने जा रही है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने जिले की कमान संभालते ही लंबित राजस्व प्रकरणों के अंबार को खत्म करने के लिए ‘राजस्व पखवाड़ा’ की घोषणा की है। यह केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि जिले के हजारों किसानों और ग्रामीणों के लिए न्याय का एक बड़ा मंच साबित होने वाला है।

राजस्व पखवाड़ा : एक अभूतपूर्व त्रि-स्तरीय रणनीति – आमतौर पर राजस्व शिविर एक-दो दिनों के होते हैं, लेकिन कलेक्टर ने इसे तीन बड़े चरणों में विभाजित कर यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी पात्र व्यक्ति छूट न जाए।

कार्यक्रम की रूपरेखा :

  • प्रथम चरण (01 – 15 अप्रैल) : इस चरण का मुख्य फोकस ‘स्क्रीनिंग और स्पॉट सेटलमेंट’ पर होगा। यानी जो मामले छोटे सुधारों से हल हो सकते हैं, उन्हें तुरंत निपटाया जाएगा।
  • द्वितीय चरण (04 – 18 मई) : यह चरण उन मामलों के लिए होगा जहाँ आपत्तियां और दावे प्राप्त हुए हैं। इसमें तहसीलदार और एसडीएम स्तर की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • तृतीय चरण (01 – 15 जून) : मानसून के आगमन से ठीक पहले यह अंतिम चरण होगा, जिसमें अभिलेखों का वितरण (B1, ऋण पुस्तिका) और अंतिम आदेशों का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

शिविरों का स्वरूप : गांव की चौपाल पर ही ‘डिजिटल’ समाधान – कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए हैं कि शिविरों में केवल कागज जमा नहीं किए जाएंगे। शिविर स्थल पर ही निम्नलिखित व्यवस्थाएं होंगी:

  • ऑनलाइन पंजीयन डेस्क : फौती नामांतरण और बंटवारा के प्रकरणों का तत्काल ऑनलाइन एंट्री।
  • मौके पर सुनवाई : पटवारी, आरआई और तहसीलदार एक ही मंच पर होंगे ताकि नोटिस जारी करने और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया में महीनों का समय न लगे।
  • नक्शा और सीमांकन दल : आधुनिक मशीनों (ETS/Drones) के माध्यम से सीमांकन के लंबित मामलों को निपटाने की योजना।

समय-सीमा (TL) बैठक के कड़े संदेश : जवाबदेही तय – कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में कलेक्टर के तेवर काफी सख्त नजर आए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा:

“जनता को दफ्तरों की सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए। यदि किसी किसान का अविवादित नामांतरण समय-सीमा के बाद भी लंबित मिला, तो संबंधित राजस्व अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।”

बहुआयामी विकास कार्यों की समीक्षा – कलेक्टर ने केवल राजस्व ही नहीं, बल्कि जिले की लाइफलाइन मानी जाने वाली अन्य योजनाओं पर भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिए:

  • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण व शहरी) : कलेक्टर ने लक्ष्य निर्धारित किया कि निर्माणाधीन आवासों को अगले तीन महीनों के भीतर पूर्ण कर ‘गृह प्रवेश’ कराया जाए। उन्होंने ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को ‘साइट विजिट’ बढ़ाने को कहा।
  • हाथी-मानव द्वंद्व का समाधान (लैलूंगा क्षेत्र) : हाथी प्रभावित गांवों के लिए एक संवेदनशील निर्णय लिया गया है। हाईमास्ट लाइट लगाने से न केवल हाथियों की निगरानी आसान होगी, बल्कि रात के समय ग्रामीणों में व्याप्त भय भी कम होगा। वन विभाग और बिजली विभाग को इसके लिए संयुक्त सर्वे के निर्देश दिए गए।
  • औद्योगिक सुरक्षा और श्रम कानून : रायगढ़ के उद्योगों में हाल की घटनाओं को देखते हुए, कलेक्टर ने श्रमिक सुरक्षा ऑडिट की बात कही। उन्होंने औद्योगिक प्रबंधन को स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों में चूक होने पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
  • बुनियादी ढांचा (स्कूल और आंगनबाड़ी) : भीषण गर्मी को देखते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि किसी भी स्कूल या आंगनबाड़ी में पीने के पानी और बिजली की किल्लत न हो। जहाँ हैंडपंप खराब हैं, उन्हें 24 घंटे के भीतर दुरुस्त करने का ‘अल्टीमेटम’ दिया गया है।
  • पीएम गति शक्ति और भविष्य का खाका : ​बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पीएम गति शक्ति योजना का प्रशिक्षण था। रायपुर से आए विशेषज्ञों ने जिला अधिकारियों को सिखाया कि कैसे डेटा की मदद से जिले के इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़क, रेल, पाइपलाइन) को बेहतर तरीके से प्लान किया जा सकता है। इसका उद्देश्य रायगढ़ को ‘लॉजिस्टिक्स हब’ के रूप में विकसित करना है।

अपील और जागरूकता : ​कलेक्टर ने कोटवारों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है कि वे गांव-गांव में ‘डौंडी’ पिटवाकर (मुनादी कर) ग्रामीणों को इन शिविरों की तारीखों के बारे में बताएं।

उपस्थिति : बैठक में अपर कलेक्टर श्री अपूर्व प्रियेश टोप्पो, डॉ. प्रियंका वर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती पूजा बंसल, डिप्टी कलेक्टर श्री धनराज मरकाम सहित लोक निर्माण, जल संसाधन, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे।

यह राजस्व पखवाड़ा रायगढ़ प्रशासन के लिए ‘अग्निपरीक्षा’ के समान है। यदि यह सफल रहता है, तो जिले में हजारों एकड़ विवादित भूमि सुलझ जाएगी और विकास की गति को नई ऊर्जा मिलेगी।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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