भिलाई में सनसनी : ‘कांग्रेस नेता की जेब में पुलिस!’… सुसाइड नोट लिखकर पेंटर ने दी जान, शरीर पर चोट के निशान से गहराया मामला …

भिलाई (दुर्ग)। छत्तीसगढ़ के स्टील सिटी भिलाई में एक पेंटर की संदिग्ध मौत ने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में 42 वर्षीय मोहन रामटेके का शव मिला है, जिसके पास से बरामद ‘सुसाइड नोट’ ने पुलिस और सत्ता के गठजोड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक ने सीधे तौर पर एक कांग्रेस नेता और सट्टा संचालकों पर ब्लैमेलिंग का आरोप लगाया है।

“पुलिस मेरी जेब में है…” – सुसाइड नोट के वो शब्द जिसने हिला दिया सिस्टम – घटनास्थल से बरामद सुसाइड नोट में मृतक मोहन रामटेके ने अपनी मौत का जिम्मेदार राजू पाल (कांग्रेस नेता) और सोनिया गोस्वामी को ठहराया है। नोट में मृतक के दर्द और बेबसी का अंदाजा इन पंक्तियों से लगाया जा सकता है :
“राजू बोलता है कि पुलिस मेरी जेब में है, क्योंकि हम कांग्रेस के नेता हैं। मेरी मौत को नजरअंदाज न करें… राजू पाल और सोनिया गोस्वामी सट्टा चलाते हैं और मुझे 1 लाख रुपये के लिए ब्लैकमेल कर रहे हैं।”
पेंटिंग के बहाने सट्टे के जाल में फंसाया? – मृतक ने बताया था कि उसे अपनी माँ के ऑपरेशन के लिए पैसों की जरूरत थी। मदद मांगने पर आरोपी राजू पाल ने उसे सट्टे के दलदल में धकेल दिया?..जब मोहन पैसे नहीं दे पाया, तो उसे पुलिस केस में फंसाने और जेल भेजने की धमकियां दी जाने लगीं।
हत्या या आत्महत्या? चोट के निशानों ने उलझाई गुत्थी – भले ही पुलिस इसे पहली नजर में खुदकुशी मान रही है, लेकिन मृतक के छोटे भाई नवीन रामटेके ने इसे ‘मर्डर’ करार दिया है।
- गंभीर चोटें : शव के सिर और शरीर पर चोट के निशान मिले हैं।
- संदेहास्पद स्थिति : शव कमरे में नीचे पड़ा हुआ था, जिससे परिजनों को हत्या का अंदेशा है।
पुलिस की कार्रवाई और बड़े अधिकारियों का जमावड़ा – मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्मृति नगर चौकी, सुपेला थाना पुलिस सहित एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर और सीएसपी सत्य प्रकाश तिवारी मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं।
एडिशनल एसपी का बयान: “शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हम सुसाइड नोट और शरीर पर मिले चोट के निशानों, दोनों पहलुओं की गहराई से जांच कर रहे हैं। कोई भी आरोपी बख्शा नहीं जाएगा।”
आम आदमी की पुलिस से मार्मिक अपील – मृतक ने मरने से पहले पुलिसकर्मियों के जमीर को झकझोरते हुए लिखा “हाथ जोड़कर अनुरोध है कि बिना किसी दबाव के फैसला लें। पहले अपने घर जाकर अपने परिवार को देखें कि यह घटना उनके साथ हो तो क्या होगा।”
बड़ा सवाल: क्या सत्ता के रसूख के आगे पुलिस निष्पक्ष जांच कर पाएगी? या फिर एक गरीब पेंटर की चीख फाइलों में दबकर रह जाएगी?
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