रायपुर के मोवा में ‘जल-विद्रोह’ : करोड़ों के फ्लैट, पर बूंद-बूंद को मोहताज 84 परिवार…

यह एक अत्यंत गंभीर विषय है। मध्यमवर्गीय परिवारों के सपनों के घर जब ‘प्यास के घर’ बन जाते हैं, तो यह न केवल बिल्डर की विफलता है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी एक बड़ा तमाचा है।
रायपुर (विशेष रिपोर्ट) : स्मार्ट सिटी की चमक और ऊंची इमारतों के शोर के बीच राजधानी रायपुर का मोवा क्षेत्र ‘प्यास’ की चीख से गूंज रहा है। आरती बिल्डकॉन के प्रोजेक्ट अशोका इम्प्रेशन (दुबे कॉलोनी) में रह रहे 84 परिवार पिछले कई हफ्तों से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। विडंबना देखिए, जिस घर को खरीदने के लिए लोगों ने अपनी जिंदगी भर की कमाई लगा दी, वहां आज पीने के पानी के लिए भी ‘पैसे की बोली’ लगानी पड़ रही है।
फरवरी से जुलाई : ‘सूखे’ का वार्षिक कैलेंडर – यहाँ की त्रासदी प्राकृतिक नहीं, बल्कि मानव-निर्मित है। हर साल फरवरी आते ही नल दम तोड़ देते हैं और जुलाई तक लोग बूंद-बूंद को तरसते हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बिल्डर ने फ्लैट्स तो बेच दिए, लेकिन बुनियादी जल संरचना (Water Infrastructure) को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
निवासियों की पीड़ा : “हम टैक्स भर रहे हैं, मेंटेनेंस दे रहे हैं, लेकिन बदले में हमें मिल रहा है सिर्फ सूखा नल और खाली बाल्टियां। क्या यही वह ‘आधुनिक जीवन’ है जिसका वादा बिल्डर ने किया था?”
बिल्डर की लापरवाही, जनता की जेब पर भारी – आरती बिल्डकॉन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर पर गंभीर आरोप लगाते हुए निवासियों ने कहा कि बिल्डर की अनदेखी की वजह से उन्हें बाजार से महंगा पानी और प्राइवेट टैंकर खरीदने पड़ रहे हैं।
- आर्थिक बोझ : टैंकरों के कारण हर महीने मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट 4,000 से 6,000 रुपये तक बढ़ गया है।
- किरायेदारों का पलायन : पानी की कमी के कारण अब किरायेदार घर छोड़ने को मजबूर हैं, जिसका खामियाजा उन मकान मालिकों को भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने निवेश के लिए घर खरीदे थे।
प्रशासनिक तंत्र की ‘कुंभकर्णी नींद’ – हैरानी की बात है कि राजधानी में ही 84 परिवार प्यासे हैं और प्रशासन मौन है। निवासियों ने अब सीधे तौर पर नगर निगम और कलेक्टर से गुहार लगाई है कि:
- बिल्डर के लाइसेंस और फायर/वाटर एनओसी की जांच हो।
- कॉलोनी में सरकारी नल कनेक्शन या बोरिंग की वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत की जाए।
- दोषी बिल्डर पर भारी जुर्माना लगाकर सप्लाई सुचारू की जाए।
अंतिम चेतावनी : अब पानी नहीं, तो चक्काजाम होगा – बढ़ती गर्मी और प्रशासन के ढुलमुल रवैये को देखते हुए अब मोवा की सड़कों पर ‘मटका फोड़ प्रदर्शन’ की तैयारी है। रहवासियों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि यदि अगले कुछ दिनों में सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करेंगे।
संपादकीय टिप्पणी : क्या रायपुर का प्रशासन किसी बड़े जन-आंदोलन का इंतजार कर रहा है? क्या बिल्डरों को केवल कंक्रीट के ढांचे खड़े करने की इजाजत है, जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी करने की नहीं?




