ड्रोन की ‘तीसरी आंख’ से कांपे नशे के सौदागर : घरघोड़ा-तमनार के दुर्गम इलाकों में प्रशासन का बड़ा एक्शन…

रायगढ़। नशे के अवैध कारोबार और मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ रायगढ़ जिला प्रशासन ने अब ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी रणनीति अपना ली है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के सीधे निर्देश पर आज घरघोड़ा और तमनार क्षेत्र में ड्रोन कैमरों के साथ एक विशाल सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस आधुनिक घेराबंदी से उन इलाकों में भी हड़कंप मच गया है, जहाँ पहुंचना कठिन माना जाता था।
आधुनिक तकनीक vs अवैध खेती : प्रशासन ने इस बार केवल कागजी कार्रवाई नहीं की, बल्कि तकनीक को हथियार बनाया। SDM घरघोड़ा दुर्गा प्रसाद अधिकारी और CSP मयंक मिश्रा के नेतृत्व में राजस्व, पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाला।
- ड्रोन सर्वे : घने जंगलों और खेतों के बीच छिपी संदिग्ध फसलों की पहचान के लिए अत्याधुनिक ड्रोन उड़ाए गए।
- ग्राउंड जीरो पर दबिश : ड्रोन से मिले इनपुट के आधार पर पटवारी और कृषि विस्तार अधिकारी सीधे खेतों में उतरे।
- कवर किए गए मुख्य गांव : बैहामुडा, भेंगारी, पाकादरहा, पानीखेत (घरघोड़ा) और आमापाली, राबो, गढ़गांव, हराडीह (तमनार)।
प्रशासन की दोटूक चेतावनी : अभियान के दौरान अधिकारियों ने न केवल जांच की, बल्कि ग्रामीणों और किसानों को सख्त लहजे में चेतावनी भी दी।
”अवैध मादक पदार्थों की खेती कानूनन अपराध है। जो भी इसमें संलिप्त पाया जाएगा, उस पर ऐसी कार्रवाई होगी जो मिसाल बनेगी। किसान अवैध रास्तों को छोड़कर वैकल्पिक और वैध फसलों की ओर रुख करें।”
श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी, SDM (राजस्व)
खबर का सार: क्यों अहम है यह कार्रवाई? –
- पहुंच से बाहर कुछ भी नहीं : ड्रोन के इस्तेमाल ने साफ कर दिया है कि अब दुर्गम पहाड़ियों या जंगलों के बीच अवैध खेती करना मुमकिन नहीं होगा।
- समन्वित प्रहार : राजस्व, पुलिस और कृषि विभाग का एक साथ आना माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने का संकेत है।
- युवाओं का भविष्य : प्रशासन का मुख्य उद्देश्य नशे की जड़ पर प्रहार कर जिले की युवा पीढ़ी को इस दलदल से बचाना है।
आगे की रणनीति : प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान केवल एक दिन का नहीं है। आने वाले दिनों में यह ‘ड्रोन सर्च’ जिला स्तर पर और अधिक आक्रामक रूप में जारी रहेगा।




