लैलूंगा में पीएम आवास पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: गरीबों के हक पर कुंडली मारकर बैठे दो सचिवों को नोटिस, सेवा समाप्ति की आहट!…

रायगढ़। जिले के लैलूंगा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को मजाक बना देने वाले दो पंचायत सचिवों पर जिला प्रशासन का चाबुक चला है। सीईओ जिला पंचायत के कड़े रुख के बाद लैलूंगा के चिराईखार और बैस्कीमुड़ा पंचायतों में हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार की बू और काम में घोर लापरवाही के आरोपों के बीच सचिव श्याम लाल सिदार और अशोक कुमार पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन का अल्टीमेटम दिया गया है।
सरकारी खजाने से निकली राशि, पर जमीन पर नहीं दिखी ईंट – लैलूंगा जनपद के इन दो गांवों में सरकारी आंकड़ों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। वित्त वर्ष 2025-26 के लक्ष्य को पूरा करना तो दूर, हितग्राहियों के खातों में पहली किश्त पहुंचने के महीनों बाद भी निर्माण कार्य ‘कागजी घोड़ों’ तक सीमित है।
- बैस्कीमुड़ा का हाल : यहाँ 131 आवास स्वीकृत हुए। 128 गरीबों को पहली किश्त की राशि भी मिल गई, लेकिन धरातल पर निर्माण की स्थिति शर्मनाक है। सचिव की ‘सुस्ती’ का आलम यह है कि अब तक मात्र 02 आवास ही पूर्ण हो पाए हैं, जबकि 82 आवासों का काम आज तक शुरू ही नहीं कराया गया है।
- चिराईखार की शर्मनाक स्थिति : यहाँ तो स्थिति और भी बदतर है। 113 स्वीकृत आवासों में से 107 हितग्राहियों को पैसा मिल चुका है, लेकिन रिपोर्ट कार्ड पर ‘शून्य’ (0) आवास पूर्ण दिखाए दे रहे हैं। यहाँ 87 आवासों का निर्माण प्रारंभ तक नहीं हुआ है।
निरीक्षण में ‘साहब’ का पारा चढ़ा : बदतमीजी और लापरवाही का संगम – सूत्रों के अनुसार, जब उच्चाधिकारी वस्तुस्थिति जानने जमीन पर उतरे, तो पंचायत सचिवों का व्यवहार ‘सहयोगात्मक’ के बजाय ‘विवादास्पद’ रहा। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने और पदीय कर्तव्यों की धज्जियां उड़ाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने इसे अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा माना है।
“शासन की मंशा स्पष्ट है – गरीब को छत मिले। लेकिन यहाँ सचिवों ने न केवल काम रोका, बल्कि निरीक्षण के दौरान अनुशासन की सीमाएं भी लांघीं।” – जिला प्रशासन सूत्र
पंचायत सेवा नियम 1998 के तहत नपेंगे सचिव – दोषी पाए जाने पर दोनों सचिवों के खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के नियम 3 के उपनियम (1), (2) और (3) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी है :
- 72 घंटे (3 दिन) के भीतर लिखित और सप्रमाण जवाब दें।
- जवाब संतोषजनक न होने पर एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई (निलंबन या सेवा समाप्ति) की जाएगी।
- आवास पूर्ण न होने की पूरी जिम्मेदारी व्यक्तिगत रूप से संबंधित सचिव की होगी।
लैलूंगा जनपद में मचा हड़कंप : इस कार्रवाई ने लैलूंगा जनपद के अन्य लापरवाह कर्मचारियों की भी रातें उड़ा दी हैं। चर्चा है कि कई अन्य पंचायतों में भी आवासों की स्थिति ऐसी ही है, जहाँ राशि डंप पड़ी है और हितग्राही झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। जिला पंचायत सीईओ के इस ‘एक्शन मोड’ से साफ संकेत है कि अब सिर्फ नोटिस नहीं, बल्कि सीधे बर्खास्तगी की गाज गिरेगी।




