खाकी का ‘खौफ’ या वसूली का ‘खेल’? बसंतपुर थाना प्रभारी पर गुंडाराज और अवैध वसूली के गंभीर आरोप…

बलरामपुर । जहाँ एक ओर सरकार ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के जरिए गरीबों के सिर पर छत देने का सपना साकार कर रही है, वहीं बसंतपुर पुलिस इस पुनीत कार्य में रोड़ा अटकाने और अपनी जेबें गरम करने में व्यस्त है। बसंतपुर थाना प्रभारी जिेंद्र कुमार सोनी पर भ्रष्टाचार और तानाशाही के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
अनुमति के बाद भी पुलिस की ‘अवैध’ कार्रवाई – मामला बसंतपुर निवासी कैलाश यादव का है। कैलाश यादव ने शासन के नियमानुसार जनपद पंचायत से विधिवत अनुमति प्राप्त कर प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों के लिए बालू (रेत) ढोने का कार्य शुरू किया था। उनके पास बाकायदा अनुमति प्रमाण पत्र (क्रमांक 1224/2026) मौजूद था।

लेकिन आरोप है कि दिनांक 4 मार्च 2026 को थाना प्रभारी के कथित ‘दलालों’ ने गाड़ी को रुकवाया। जब कैलाश यादव ने वैध दस्तावेज दिखाए, तो उन्हें नजरअंदाज कर पुलिस ने जबरन ट्रैक्टर को थाने में खड़ा कर दिया।
दलालों के जरिए 10,000 की मांग, मना करने पर कटा चालान – पीड़ित कैलाश यादव का आरोप है कि थाना प्रभारी के गुर्गों ने गाड़ी छोड़ने के एवज में 10,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। जब कैलाश ने यह कहकर पैसे देने से मना कर दिया कि उनके पास वैध सरकारी अनुमति है, तो खुन्नस में आकर थाना प्रभारी ने गाड़ी का भारी-भरकम चालान काट दिया।
“मेरे पास जनपद पंचायत की वैध अनुमति है, फिर भी पुलिस मुझे प्रताड़ित कर रही है। सिर्फ इसलिए क्योंकि मैंने रिश्वत देने से मना कर दिया।” – कैलाश यादव (पीड़ित)
बिना अनुमति वाले ‘खास’ लोगों को खुली छूट? – हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक ओर वैध अनुमति वाले ट्रैक्टर को प्रताड़ित किया जा रहा है, वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि थाना प्रभारी की मिलीभगत से क्षेत्र में दर्जनों अवैध ट्रैक्टर बिना किसी अनुमति के बेखौफ रेत का परिवहन कर रहे हैं। चर्चा है कि जो ‘सुविधा शुल्क’ पहुँचा रहे हैं, उनके लिए नियम-कानून मायने नहीं रखते।
उठते सवाल : क्या दोषियों पर होगी कार्रवाई? – यह मामला साफ तौर पर पुलिस की मनमानी और भ्रष्टाचार को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस ‘गुंडाराज’ पर लगाम कसते हैं या फिर गरीब हितग्राही और ट्रैक्टर मालिक इसी तरह व्यवस्था की चक्की में पिसते रहेंगे।




