बलरामपुर में ‘वाइट पॉइजन’ का साम्राज्य: 1.75 करोड़ की अफीम जब्त, झारखंड के तस्करों ने छत्तीसगढ़ के खेतों को बनाया ‘सेफ हेवन’…

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के सरहदी इलाकों में नशे की खेती का एक ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। जिले के कोरंधा थाना क्षेत्र के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पुलिस ने सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए करीब ढाई एकड़ में लहलहा रही अफीम की फसल को तहस-नहस कर दिया है। पुलिस ने मौके से 18 क्विंटल अफीम के पौधे (285 बोरे) जब्त किए हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत पौने दो करोड़ रुपए आंकी जा रही है।
मसाले के नाम पर ‘मौत की खेती’ – पकड़े गए स्थानीय किसानों, सहादुर नगेशिया और टुईला राम ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। किसानों का दावा है कि वे इस ‘काले खेल’ के मोहरे मात्र थे। झारखंड के चतरा निवासी भूपेंद्र उरांव नामक शख्स ने उन्हें ‘विदेशी मसाले’ की खेती का झांसा देकर लालच दिया था।
- साजिश : किसानों को बताया गया कि यह कीमती मसाला है और फसल कटने पर मोटा मुनाफा मिलेगा।
- मजदूरी : जमीन महज 6 हजार रुपए सालाना पर ली गई थी।
- पहरेदारी : चतरा (झारखंड) से आए 4-5 संदिग्ध मजदूर ही खेतों की सिंचाई, चीरा लगाने और पहरेदारी का काम करते थे, जो पुलिस के आने से पहले फरार हो गए।
झारखंड में सैटेलाइट की नजर, तो छत्तीसगढ़ को बनाया ठिकाना : जांच में यह कड़वा सच सामने आया है कि झारखंड पुलिस की सख्ती और सैटेलाइट निगरानी से बचने के लिए अंतरराज्यीय ड्रग माफिया ने छत्तीसगढ़ के बलरामपुर को अपना नया ठिकाना चुन लिया है। खजुरी का यह इलाका झारखंड सीमा से महज 1.5 किलोमीटर दूर है। दुर्गम पहाड़ और घने जंगलों के बीच स्थित इन खेतों तक पहुंचना इतना मुश्किल है कि स्थानीय पटवारी तक आज तक वहां नहीं पहुंची थीं।
ऑपरेशन की बड़ी बातें :
- बरामदगी : 18 क्विंटल अफीम के पौधे, 3 ट्रैक्टरों में भरकर थाने लाए गए।
- तैयारी : कई पौधों (डोडों) में पहले ही चीरा लगाकर अफीम निकाली जा चुकी थी।
- सिंचाई : प्राकृतिक जल स्रोतों से पाइप लाइन बिछाकर अवैध तरीके से पानी पहुंचाया जा रहा था।
- गिरदावरी में झोल : राजस्व रिकॉर्ड में इन जमीनों पर किसी अन्य फसल का जिक्र है, जो विभाग की लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
SP का सख्त रुख : अब चप्पे-चप्पे की होगी जांच – बलरामपुर एसपी वैभव बैंकर ने साफ कर दिया है कि झारखंड के तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा। कुसमी के बाद यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। अब जिले के अन्य दूरस्थ इलाकों में भी सर्वे कराया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी ‘लालच के बीज’ तो नहीं बोए गए हैं।
“हम इस अवैध धंधे की जड़ों तक जाएंगे। तस्करों ने हमारी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश की है, लेकिन अब हर संदिग्ध खेत पर पुलिस की पैनी नजर है।” – पुलिस प्रशासन, बलरामपुर
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