बालोद

विशेष रिपोर्ट : ‘दादा’ कहने वाले मकान मालिक की दरिंदगी ने ली दो जानें, यूट्यूब पर ढूंढता रहा मौत का नुस्खा…

बालोद (छत्तीसगढ़): जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और गरीबी न्याय का गला घोंटने लगे, तो परिणाम डौंडीलोहारा जैसी रूह कंपा देने वाली वारदात के रूप में सामने आता है। एक 59 वर्षीय रसूखदार मकान मालिक, सुनील घरडे, ने अपनी 22 साल की किराएदार युवती के साथ जो किया, वह केवल अपराध नहीं, बल्कि मानवता की पराकाष्ठा है।

(आरोपी : सुनील कुमार घरडे)

गरीबी का खौफनाक सौदा : ₹1500 का किराया और अस्मत की बोली – कोविड काल में पिता को खोने के बाद, एक बेसहारा परिवार डौंडीलोहारा में सुनील घरडे के मकान में ₹1500 महीने पर रहने आया था। मां मजदूरी करती, भाई गुपचुप के ठेले पर बर्तन धोता, ताकि सिर पर छत बनी रहे। इसी मजबूरी को सुनील ने अपना हथियार बनाया।

  • भरोसे का कत्ल : युवती उसे ‘दादा’ (दादाजी/बुजुर्ग) कहकर सम्मान देती थी, जबकि आरोपी सरेआम कहता था, “मैं इससे प्यार करता हूँ, मेरी शादी करवा दो।”
  • पैर दबवाने से रेप तक : खाली घर और अकेलेपन का फायदा उठाकर सुनील ने युवती को पैसे का लालच दिया और फिर डरा-धमकाकर उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया।

बदनामी का डर और मां की खामोशी : जब युवती को पता चला कि वह 4 महीने की गर्भवती है, तो उसने अपनी मां को सब बताया। मां ने हिम्मत जुटाकर आरोपी से सवाल किया, लेकिन शातिर सुनील ने ‘बदनामी’ का ऐसा जाल बुना कि मां की ममता डर के आगे हार गई।

  • आरोपी का झूठा आश्वासन : “मैंने बिगाड़ा है, मैं ही सुधारूंगा।” इस जुमले के पीछे आरोपी ने पूरे परिवार को घर से बाहर निकालने और समाज में जलील करने की धमकी देकर चुप करा दिया।

डिजिटल दरिंदगी : यूट्यूब बना ‘अधमरा’ डॉक्टर – अपनी करतूत को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए सुनील ने कभी किसी डॉक्टर या अस्पताल की मदद नहीं ली। पुलिस जांच में जो खुलासे हुए वे हैरान करने वाले हैं :

  • सर्च हिस्ट्री का काला सच : आरोपी के मोबाइल में ‘गर्भ गिराने के तरीके’, ‘बच्चा कैसे गिराएं’ जैसे सैकड़ों वीडियो सर्च किए गए थे।
  • 9वें महीने की क्रूरता : जब 9 मार्च को युवती को प्रसव पीड़ा (Labour Pain) हुई, तो आरोपी अस्पताल ले जाने के बजाय मेडिकल स्टोर से भारी मात्रा में ‘पेनकिलर’ ले आया। बिना किसी डॉक्टरी सलाह के उसने युवती को दवाइयां खिला दीं।

तड़प-तड़प कर हुई मौत : मां और नवजात ने तोड़ा दम – पेनकिलर ने दर्द कम करने के बजाय जटिलता (Complications) बढ़ा दी। बच्चा आधा बाहर आ चुका था, लेकिन दवा के रिएक्शन और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण 15 मिनट के भीतर युवती और उसके नवजात शिशु ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। आरोपी तब भी मदद के लिए किसी को बुलाने के बजाय अपराध छिपाने की फिराक में था।

बेनकाब हुआ चेहरा : अंतिम संस्कार की जल्दबाजी ने खोला राज – सुनील ने परिवार पर दबाव डाला कि वे तुरंत अंतिम संस्कार कर दें। लेकिन जब युवती के रिश्तेदार पहुंचे, तो उन्होंने युवती के शरीर की स्थिति (फूला हुआ पेट) देखकर संदेह जताया।

  • पुलिस की पैनी नजर : वॉर्ड वासियों की सूचना पर एसपी मोनिका ठाकुर के नेतृत्व में टीम पहुंची। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने आरोपी के झूठ की धज्जियां उड़ा दीं  – पेट में 3 किलो का मृत नवजात फंसा हुआ था।
  • DNA की धमकी से टूटा आरोपी : पहले युवती के चरित्र पर सवाल उठाने वाला आरोपी तब टूट गया जब पुलिस ने कहा कि ‘DNA टेस्ट’ से सब साफ हो जाएगा। उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

कानूनी कार्रवाई (BNS की धाराएं) : पुलिस ने सुनील कुमार घरडे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है:

  • धारा 105: गैर-इरादतन हत्या (Culpable homicide not amounting to murder)।
  • धारा 64(2)(m): बार-बार बलात्कार करना।
  • धारा 90, 91: गर्भपात कारित करना।
  • धारा 238, 351(3): साक्ष्य छिपाना और आपराधिक धमकी।

यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि डिजिटल युग में ‘यूट्यूब’ जैसे प्लेटफॉर्म अपराधियों के लिए ‘हथियार’ कैसे बन रहे हैं, और कैसे सामाजिक लोकलाज आज भी एक अपराधी को बचाने में ढाल का काम करती है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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