रायपुर

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर ‘वज्रपात’ : साय कैबिनेट का बड़ा फैसला, अब लालच या दबाव में धर्म बदला तो होगी 10 साल की जेल…

धर्मांतरण संशोधन विधेयक 2026 : एक अभेद्य कानूनी ढांचा – सरकार का मुख्य उद्देश्य बस्तर और जशपुर जैसे आदिवासी अंचलों में हो रहे ‘मिशनरी धर्मांतरण’ और ‘डेमोग्राफिक चेंज’ को रोकना है। इस कानून के प्रमुख स्तंभ निम्नलिखित हैं:

कठोर प्रक्रिया (The Process) : ​अब अपनी मर्जी से भी धर्म बदलना आसान नहीं होगा। इसके लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र तैयार किया गया है:

  • पूर्व सूचना (Pre-Intimation) : धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति और धर्म परिवर्तन कराने वाले (पंडित, पादरी, मौलवी आदि) को 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित सूचना देनी होगी।
  • पुलिस जाँच (Investigation) : सूचना मिलते ही जिला प्रशासन पुलिस के जरिए यह जांच कराएगा कि क्या यह परिवर्तन किसी डर, लालच या दबाव में तो नहीं हो रहा?
  • पंजीकरण और सत्यापन : धर्म बदलने के 60 दिन के भीतर एक सार्वजनिक घोषणा (Declaration) करनी होगी। प्रशासन इसे 30 दिनों तक नोटिस बोर्ड पर चस्पा करेगा ताकि यदि किसी को आपत्ति हो तो वह दर्ज करा सके।

दंड और आर्थिक चोट (Punishment & Penalty) : ​इस विधेयक में सजा को इतना सख्त बनाया गया है कि यह एक ‘नजीर’ बने:

  • गैर-जमानती अपराध : अवैध धर्मांतरण के मामलों में अब जमानत मिलना आसान नहीं होगा।
  • सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion) : यदि एक साथ कई लोगों का धर्म बदला जाता है, तो मुख्य आरोपी को 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माना देना होगा।
  • मुआवजा : कोर्ट दोषी व्यक्ति को आदेश दे सकता है कि वह पीड़ित को ₹5 लाख तक का हर्जाना दे।

सामाजिक और कानूनी प्रभाव :

  • विवाह की वैधता: यदि कोई व्यक्ति पहचान छिपाकर या केवल धर्म बदलवाने के उद्देश्य से शादी करता है, तो वह शादी अमान्य (Null and Void) घोषित कर दी जाएगी।
  • आरक्षण का कवच : यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) या जनजाति (ST) से धर्मांतरित होता है, तो वह उन संवैधानिक लाभों का हकदार नहीं रहेगा जो मूल धर्म के लिए आरक्षित हैं।

परीक्षा और भर्ती : युवाओं के लिए ‘क्लीन स्लेट’ – नकल और पेपर लीक की घटनाओं से निपटने के लिए कैबिनेट ने दो बड़े प्रशासनिक ढांचे तैयार किए हैं:

  • छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CG Selection Board) : अब तक व्यापम और PSC पर उठते सवालों के बीच, सरकार एक नया बोर्ड बना रही है। यह मंडल विशेष रूप से तृतीय (Group C) और चतुर्थ (Group D) श्रेणी के तकनीकी और गैर- तकनीकी पदों पर पारदर्शी भर्ती करेगा।
  • नकल विरोधी कानून : सरकारी परीक्षाओं में अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले परीक्षार्थियों और इसमें शामिल ‘सॉल्वर गैंग’ या प्रिंटिंग प्रेस के खिलाफ सख्त जेल और संपत्ति कुर्क करने जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।

आर्थिक और ढांचागत सुधार (Economic Reforms) : कैबिनेट ने आम जनता की जेब और इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखते हुए ये बदलाव किए हैं:

  • संपत्ति पंजीयन (Property Registration) : रजिस्ट्री के समय लगने वाला अतिरिक्त उपकर (Cess) हटा दिया गया है। इससे मकान और जमीन खरीदना सस्ता होगा और रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।
  • सोलर पावर मिशन : पर्यावरण संरक्षण के लिए सोलर हाईमास्ट और बायोगैस संयंत्रों पर 1.50 लाख रुपये का सरकारी अनुदान सीधे तौर पर दिया जाएगा। यह योजना 2026 तक प्रभावी रहेगी।
  • भू-राजस्व संहिता (Land Revenue Code) : धारा 40, 50 और 59 में संशोधन का उद्देश्य जमीन के डायवर्जन और सीमांकन की प्रक्रिया को डिजिटल और आसान बनाना है, ताकि पटवारियों के चक्कर न काटने पड़ें।

राजनीतिक सौहार्द और खेल :

  • मुकदमों की वापसी : राजनीतिक आंदोलनों के दौरान कार्यकर्ताओं पर दर्ज 13 गंभीर मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया है। यह उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो लंबे समय से कानूनी प्रक्रियाओं में फंसे थे।
  • खेल का मैदान : राजनांदगांव में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए 5 एकड़ बेशकीमती जमीन क्रिकेट एसोसिएशन को दी गई है, जिससे राज्य में खेल प्रतिभाओं को मंच मिलेगा।

​यह कैबिनेट बैठक केवल प्रशासनिक सुधारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें ‘सांस्कृतिक संरक्षण’ का स्पष्ट संदेश था। धर्मांतरण कानून के जरिए सरकार ने अपने ‘कोर एजेंडे’ को मजबूती दी है, जबकि भर्ती बोर्ड और उपकर खत्म करने जैसे फैसलों से युवाओं और मध्यम वर्ग को साधने की कोशिश की है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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