रायगढ़

सिस्टम की ‘बेरहमी’ से फीकी पड़ी स्वास्थ्य रक्षकों की होली: बजट की ‘गंगा’ बही, फिर भी खाली हैं रायगढ़ के 750 NHM कर्मियों की जेबें…

रायगढ़। जहाँ एक ओर पूरा प्रदेश रंगों के त्यौहार होली के उल्लास में डूबने की तैयारी कर रहा है, वहीं रायगढ़ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कहे जाने वाले 750 एन.एच.एम. (NHM) संविदा कर्मचारी अंधेरे भविष्य और खाली जेबों के साथ मानसिक अवसाद में हैं। विडंबना देखिए कि विभाग के पास 15.50 करोड़ का बजट आया, लेकिन प्रबंधन की ‘अदूरदर्शिता’ ऐसी रही कि कर्मचारियों के दो वक्त की रोटी और त्यौहार के लिए एक रुपया सुरक्षित नहीं रखा गया।

करोड़ों का बजट ‘साफ’, पर कर्मचारियों के लिए ‘निल’ बटे सन्नाटा – दस्तावेजों के मुताबिक, 1 दिसंबर 2025 को जिले को 1550 लाख (15.50 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम वित्तीय सीमा प्राप्त हुई थी। नियमतः इसमें से कम से कम दो माह का वेतन रिजर्व रखा जाना था, लेकिन पूरी राशि ‘स्वाहा’ कर दी गई। नतीजा यह है कि फरवरी 2026 बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य रक्षकों के हाथों में धेला तक नहीं है। सवाल यह उठता है कि क्या विभाग की प्राथमिकता में उन कर्मचारियों का पेट पालना शामिल नहीं है जो दिन-रात जनता की सेवा करते हैं?

‘दिवाली’ का वादा टूटा, अब ‘होली’ पर भी छल – ​शासन ने दिवाली के समय अग्रिम वेतन के बड़े-बड़े निर्देश दिए थे, जो रायगढ़ में कागजों तक ही सीमित रह गए। अब होली सिर पर है (4 मार्च), लेकिन जनवरी और फरवरी का लंबित वेतन कर्मचारियों के लिए जी का जंजाल बन गया है। बच्चों की स्कूल फीस, मकान किराया, बीमार माता-पिता की दवाइयां और बैंकों की किश्तें (EMI) अब इन कर्मचारियों को डरा रही हैं।

नई व्यवस्था भी फेल : फाइलों में दबा ‘पे-डाटा’ – ​जनवरी 2026 से लागू नई व्यवस्था के तहत 16 तारीख से अगली 15 तारीख तक पे-डाटा भेजने का प्रावधान है। इसके बावजूद फरवरी का वेतन आज तक अप्राप्त है। एनएचएम संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरी और प्रवक्ता पुरन दास ने तीखे शब्दों में कहा है कि “यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का हनन है।”

वित्त मंत्री और कलेक्टर से आस, वरना ठप होगी स्वास्थ्य सेवा! – ​संघ के पदाधिकारियों ने 27 फरवरी को CMHO कार्यालय में दस्तक दी है और जनप्रिय विधायक व वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी सहित कलेक्टर से इस ‘वित्तीय कुप्रबंधन’ को सुधारने की गुहार लगाई है। कर्मचारियों ने दो टूक चेतावनी दी है:

  • माह फरवरी का वेतन तत्काल जारी हो।
  • वेतन के लिए स्थायी और नियमित व्यवस्था बने।

सावधान! यदि समय रहते इन “स्वास्थ्य के सिपाहियों” को उनका हक नहीं मिला, तो आंदोलन की चिंगारी प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को ठप कर सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या इन 750 परिवारों की होली बेरंग ही रह जाती है।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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