धमाका : हाई कोर्ट ने तमनार नगर पंचायत की ‘कमेटी राज’ पर लगाया ब्रेक, ग्राम पंचायत की सत्ता बहाल…

बिलासपुर/रायगढ़ : तमनार ब्लॉक को नगर पंचायत बनाने की सरकारी जल्दबाजी पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने तगड़ा झटका दिया है। माननीय न्यायालय ने तमनार में लोकतंत्र के ‘चुने हुए प्रतिनिधियों’ को हटाकर ‘कमेटी’ को सत्ता सौंपने वाली अधिसूचना पर तत्काल रोक (Stay) लगा दी है। इस आदेश के बाद अब तमनार ग्राम पंचायत पूर्व की भांति अपना कामकाज संभालती रहेगी।
अदालत की फटकार : कानून को दरकिनार करना पड़ा भारी – जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की बेंच में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ग्राम पंचायत तमनार की ओर से एडवोकेट हमीदा सिद्दीकी ने शासन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। मुख्य तर्क यह था कि:
- नियमों की अनदेखी : नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 5(1) स्पष्ट कहती है कि जब तक नई नगर पंचायत के चुनाव न हो जाएं, तब तक मौजूदा ग्राम पंचायत का ही अधिकार क्षेत्र बना रहेगा।
- जल्दबाजी में कमेटी गठन : सरकार ने 16 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी कर धारा 16(1) के तहत एक समिति गठित कर दी, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है।
- अनुसूचित क्षेत्र का मुद्दा : तमनार एक ‘अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र’ (Scheduled Area) है, जहाँ पंचायतों की शक्तियों के साथ छेड़छाड़ करना कानूनी रूप से जटिल है।
सरकार की दलील नहीं आई काम : सरकारी वकील ने अदालत में तर्क दिया कि यह पूरी प्रक्रिया बसंतपाली ग्राम पंचायत द्वारा 27 फरवरी 2024 को पारित एक पुराने प्रस्ताव के आधार पर की गई है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को अंतरिम राहत रोकने के लिए पर्याप्त नहीं माना और शासन को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।
फैसले का बड़ा असर :
- समिति हुई भंग : 16-02-2026 को गठित कमेटी के सभी अधिकार फिलहाल छीन लिए गए हैं।
- सरपंच-पंचों की वापसी : याचिकाकर्ता ग्राम पंचायत को पुनः अपने पूर्ण अधिकारों के साथ कार्य करने की अनुमति मिल गई है।
- अगली सुनवाई तक रोक : न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह रोक अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगी।
बड़ी बात : यह आदेश उन प्रयासों के खिलाफ एक बड़ी जीत माना जा रहा है जहाँ स्थानीय स्वशासन की चुनी हुई संस्थाओं को प्रशासनिक समितियों से बदलने की कोशिश की जा रही थी।




