फर्जी अंकसूची का ‘खेला’ : शिक्षक चंदराम यादव की बढ़ी मुश्किलें, जांच में उजागर हुआ 1210 और 880 अंकों का मायाजाल…

बलौदाबाजार -भाटापारा। मनीराम आज़ाद : शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक और चौंकाने वाला नमूना शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला दलदली में देखने को मिला है। यहाँ पदस्थ शिक्षक चंदराम यादव के विरुद्ध फर्जी बी.एससी. अंकसूची के सहारे सरकारी नौकरी हथियाने का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। संभागीय संयुक्त संचालक (JD) रायपुर की सख्ती के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने विभाग के भीतर खलबली मचा दी है।
प्रतिशत का ‘जादू’: 48% को बना दिया 67% – जांच में जो सबसे सनसनीखेज खुलासा हुआ है, वह अंकों की हेराफेरी से जुड़ा है। भर्ती के समय प्रस्तुत दस्तावेजों में चंदराम यादव ने खुद को 67.22 प्रतिशत (1210 अंक) का मेधावी छात्र बताया था। लेकिन जब पं. रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर से रिकॉर्ड का मिलान किया गया, तो हकीकत कुछ और ही निकली।

- दावा: 1800 में से 1210 अंक।
- हकीकत: 1800 में से मात्र 880 अंक (48.88 प्रतिशत)।
कड़वा सच : नियुक्ति पाने के लिए अंकों में लगभग 20% का “कृत्रिम इजाफा” किया गया, ताकि चयन सूची में नाम सुनिश्चित किया जा सके।

दोहरा खेल: जॉइनिंग और नियुक्ति में अलग-अलग दस्तावेज – जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जांजगीर-चांपा द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन ने शिक्षक की चतुराई की पोल खोल दी है। जांच समिति ने पाया कि नियुक्ति के समय और कार्यभार ग्रहण (जॉइनिंग) करते समय अलग-अलग अंकसूचियों की फोटोकॉपी जमा की गई थी। यह विसंगति चीख-चीख कर कह रही है कि यह महज मानवीय त्रुटि नहीं, बल्कि सुनियोजित धोखाधड़ी है।

विभागीय कार्रवाई की लटकी तलवार : संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। DEO की पुष्टि के बाद अब चंदराम यादव के विरुद्ध विभागीय जांच (DE) और विधिक कार्रवाई (FIR) की तैयारी तेज हो गई है।
- संभावित परिणाम : सेवा समाप्ति, वेतन की रिकवरी और धोखाधड़ी के मामले में जेल की हवा।
मुख्य बिंदु जो मामले को गरमा रहे हैं:
- सत्यापन में चूक : आखिर भर्ती के समय चयन समिति ने मूल दस्तावेजों का सूक्ष्म मिलान क्यों नहीं किया?
- साजिश या लापरवाही : क्या इस फर्जीवाड़े में विभाग के कुछ और भी ‘सफेदपोश’ शामिल हैं?
- कड़ा संदेश : इस कार्रवाई से उन लोगों में खौफ है जो फर्जी दस्तावेजों के दम पर व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे हैं।
यह मामला सिर्फ एक शिक्षक की जालसाजी का नहीं, बल्कि उन योग्य उम्मीदवारों के हक पर डाका है जो चंद अंकों की कमी से बाहर रह गए। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी जल्दी इस ‘फर्जी’ करियर पर पूर्णविराम लगाता है।




