जशपुर

दुलदुला स्पेशल : “साहब ने फेंकी ऐसी गुगली कि RTI हो गई क्लीन बोल्ड!”…

  • खबर की सुर्खी: “मेरे पास कुछ नहीं है, जो है पड़ोसियों के पास है” – दुलदुला जनपद के CEO का नया ‘डाक-बाबू’ अवतार!…

जशपुर। अगर आपको लगता है कि सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले अधिकारी केवल फाइलें निपटाते हैं, तो आप गलत हैं। जनपद पंचायत दुलदुला के महानुभावों ने साबित कर दिया है कि वे ‘पल्ला झाड़ने’ की कला में ओलंपिक गोल्ड मेडल के हकदार हैं।

ऋषिकेश मिश्रा नाम के एक ‘गुस्ताख’ नागरिक ने पूछ लिया कि पिछले 5 साल में पंचायतों में RTI के नाम पर किसने-किसने वसूली की और विभाग ने उन पर क्या ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की? अब सवाल तीखा था, तो जवाब भी उतना ही ‘मीठा’ और ‘घुमावदार’ मिला।

साहब का ‘गूगल मैप’ वाला जवाब – ​आवेदक को जानकारी देने के बजाय, जनपद के मुखिया ने उसे ‘तीर्थ यात्रा’ पर भेज दिया है। साहब का कहना है— “भैया, हम तो सिर्फ नाम के मुखिया हैं। असली खजाना तो ग्राम पंचायतों में छुपा है। जाओ, हर पंचायत का दरवाजा खटखटाओ, अलग-अलग अर्जी लगाओ और खुद ही जासूस बन जाओ!” इस जवाब के पीछे का असली ‘ज्ञान’ समझिए:

  • ज़िम्मेदारी का ‘निर्वाण’ : नियम कहता है कि अगर जानकारी दूसरी जगह की है, तो अधिकारी उसे खुद ट्रांसफर करे। लेकिन यहाँ साहब ने सोचा— “अगर मैं खुद काम करूँगा, तो मेरी ‘अधिकारी’ वाली ठसक कम हो जाएगी। क्यों न आवेदक को ही दफ्तर-दफ्तर दौड़ाया जाए?”
  • वसूली की शिकायतों पर ‘मौन व्रत’ : पंचायत सचिवों से RTI के नाम पर किसने पैसे खाए? इस पर साहब की चुप्पी ऐसी है जैसे कोई गहरा राज दफन हो। आखिर अपनों की जांच के बारे में बताकर खुद का बीपी क्यों बढ़ाया जाए?
  • डिजिटल इंडिया का असली मतलब : पोर्टल पर पंचायतों के नाम दर्ज हैं, बस इसी को ‘पारदर्शिता’ मान लिया गया है। जानकारी देना तो पुरानी बात हो गई, अब तो बस ‘रास्ता दिखाना’ ही सेवा है।

पंचायत दर्शन योजना का शुभारंभ! -ऐसा लगता है कि दुलदुला जनपद ने नई योजना शुरू की है— “RTI लगाओ, पंचायतें घुमो।” जो जानकारी एक क्लिक पर जनपद कार्यालय में उपलब्ध होनी चाहिए थी, उसके लिए आवेदक को अब दर्जनों पंचायतों की धूल फाँकनी होगी।

विशेष टिप्पणी : धन्य हैं वो अधिकारी जो RTI (Right to Information) को RTG (Right to Go Away) बना देते हैं। साहब की इस फुर्ती को देखकर तो लगता है कि आने वाले समय में अगर कोई अपना नाम पूछेगा, तो ये कह देंगे— “आधार कार्ड के दफ्तर जाकर पता करो, हमारे पास सिर्फ आपकी शक्ल का रिकॉर्ड है!”

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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