अजब छत्तीसगढ़ की गजब लीला : ‘अदृश्य’ हो गया 65 बोरी धान से लदा पिकअप, क्या पुलिस ने सिखाया ‘जादू’?…

वाड्रफनगर। छत्तीसगढ़ अपनी लोक संस्कृति के लिए जाना जाता है, लेकिन बलरामपुर जिले के बसंतपुर थाने में आजकल ‘गायब होने वाली कला’ का एक नया ही प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। यहाँ कानून की आँखों में धूल झोंकना तो पुरानी बात हो गई, अब तो पूरी की पूरी पिकअप गाड़ी ही हवा में विलीन हो रही है।
आधी रात का ‘सेल्फी’ प्रेम और फिर… सन्नाटा : किस्सा बड़ा दिलचस्प है। 8 जनवरी की कड़कड़ाती ठंड में ग्राम बसंतपुर में नायब तहसीलदार साहब ने बड़ी बहादुरी दिखाते हुए उत्तर प्रदेश से आ रहे 65 बोरी अवैध धान को पकड़ा। पुलिस की गश्ती टीम भी मौके पर पहुँची, बाकायदा पिकअप के साथ फोटो खिंचवाई गई ताकि ‘सिस्टम’ की मुस्तैदी दुनिया देख सके। लेकिन जैसे ही फोटो खिंचकर फ्लैश लाइट बंद हुई, सिस्टम भी शायद ‘स्लीप मोड’ में चला गया।
बिना नंबर की गाड़ी, बिना ड्राइवर की कार्रवाई? – मजे की बात देखिए, उस पिकअप पर नंबर प्लेट नहीं थी। ड्राइवर मौके से फरार हो गया और पीछे छोड़ गया तो बस 65 बोरी धान। पुलिस ने गाड़ी को अपने सुपुर्द तो लिया, लेकिन उसके बाद गाड़ी ने ऐसी ‘उड़ान’ भरी कि आज तक थाने का रास्ता नहीं खोज पाई। न कोई FIR हुई, न ही धान की नीलामी का कोई अता-पता है।
ऐसा लगता है जैसे मोटर व्हीकल एक्ट और आवश्यक वस्तु अधिनियम सिर्फ किताबों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं, क्योंकि जमीन पर तो ‘आशीर्वाद’ का खेल चल रहा है।
संपादक ने दागे तीखे सवाल : ‘भारत सम्मान न्यूज़’ के प्रधान संपादक जितेंद्र कुमार जायसवाल ने अब इस तिलिस्म से पर्दा उठाने का मन बना लिया है। उन्होंने पुलिस से सीधा सवाल पूछा है कि:
- पिकअप गाड़ी को कौन सा ‘पंख’ लगा था कि वो थाने पहुँचने से पहले ही उड़ गई?
- किस ‘महापुरुष’ के आदेश पर अवैध धान और वाहन को बिना कार्रवाई छोड़ दिया गया?
- क्या अब तहसीलदार साहब पर कार्रवाई के लिए भी किसी शुभ मुहूर्त का इंतजार हो रहा है?
सिस्टम की ‘पारदर्शिता’ पर सवाल : आवेदन तो संभाग आयुक्त और पुलिस महानिरीक्षक तक पहुँच चुका है। अब देखना यह है कि क्या यह अवैध धान वाकई किसी बड़े घोटाले की ‘खुराक’ बन गया है या फिर पुलिस विभाग इस ‘अदृश्य गाड़ी’ को ढूँढ निकालने का चमत्कार कर पाती है। जनता तो बस यही पूछ रही है – साहब, वो 65 बोरी धान कहाँ गया?




