रायगढ़

तालाब में डूबा मासूम शावक: धरमजयगढ़ के जंगलों में हाथियों का मातम, वन विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल

रायगढ़। जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल रेंज में हाथियों के दल पर एक दर्दनाक हादसा घटा। सरईमुड़ा तालाब में नहाने पहुंचे करीब 20 हाथियों के झुंड में शामिल 7 महीने के एक शावक की तालाब में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरा झुंड घंटों तक बेचैनी में तालाब के किनारे मंडराता रहा, सूंड से शावक को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा।

ग्रामीणों के मुताबिक, सोमवार देर रात यह हादसा तब हुआ जब हाथियों का दल गहरे पानी में उतर गया। नन्हा शावक गहराई में चला गया और कुछ ही पलों में पानी में डूब गया। उसके बाद हाथियों ने उसे बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन अंधेरे और पानी की गहराई के कारण वे असहाय रह गए।

ग्रामीणों ने दी सूचना, देर से पहुंचा वन विभाग :मंगलवार शाम जब स्थानीय ग्रामीणों ने तालाब में शव तैरता देखा, तो तुरंत वन विभाग को सूचना दी गई। लेकिन विभागीय अमला देर शाम मौके पर पहुंचा और अंधेरा होने का हवाला देकर पोस्टमॉर्टम अगले दिन तक टाल दिया। बुधवार सुबह शव का पंचनामा और पोस्टमॉर्टम कर अंतिम संस्कार की औपचारिकता पूरी की गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हाथियों का झुंड पिछले कई दिनों से इसी इलाके में विचरण कर रहा था, फिर भी वन विभाग ने एहतियात या मॉनिटरिंग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की थी।

वन विभाग की सफाई, लेकिन सवाल बरकरार : छाल रेंजर राजेश चौहान ने बताया –

“हाथियों का झुंड अक्सर तालाबों में नहाने आता है। सोमवार रात भी झुंड नहाने पहुंचा था, तभी शावक गहरे पानी में डूब गया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है।”

हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों की ऐसी दुखद मौतें विभाग की निगरानी और सतर्कता की कमी को उजागर करती हैं। क्षेत्र में सक्रिय 50 से अधिक हाथियों की गतिविधियों पर नियंत्रण और मार्गदर्शन न होने से मानव-हाथी संघर्ष का खतरा और बढ़ सकता है।

53 हाथियों का झुंड कर रहा विचरण, ग्रामीणों में भय : वर्तमान में छाल रेंज में 53 हाथियों का झुंड अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय है, जिसमें एक सिंगल हाथी भी शामिल है। वन विभाग ने हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और आसपास के गांवों में मुनादी कर सतर्कता बरतने की अपील की है। फिर भी, ग्रामीणों में भय का माहौल है – उनका कहना है कि जब तक विभाग गश्त और चेतावनी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं करता, ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।

धरमजयगढ़ के जंगलों में चेतावनी: यह सिर्फ हादसा नहीं, एक संकेत है : पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का संकेत है। हाथियों के पारंपरिक मार्गों में मानव दखल, अवैज्ञानिक तालाब निर्माण और मॉनिटरिंग की कमी अब वन्यजीवों की जान ले रही है।

धरमजयगढ़ के जंगलों में नन्हे शावक की यह मौत वन विभाग की व्यवस्था पर एक मौन प्रश्नचिह्न बन गई है –
क्या अब भी वन्यजीव संरक्षण केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित रहेगा?

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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