कुसुमकसा के गैरेजपारा में पनपा अवैध शराब का कारोबार, जनप्रतिनिधियों की खामोशी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले के डौंडी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुसुमकसा का गैरेजपारा मोहल्ला इन दिनों अवैध नशे के कारोबार का गढ़ बन चुका है। बेखौफ फल-फूल रहे इस काले धंधे ने पूरे क्षेत्र में डर, अशांति और अराजकता का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, किसी रवि ठाकुर और मोहनिश राजाभोज नाम के व्यक्ति लंबे समय से बिना किसी खौफ के खुलेआम शराब की अवैध बिक्री कर रहे हैं। हमेशा चलने वाले इस गैर-कानूनी तंत्र के कारण आए दिन गाली-गलौज, आपसी रंजिश और मारपीट जैसी घटनाएं आम बात हो गई हैं, जिससे आम जनता की शांति और सुरक्षा पूरी तरह छिन चुकी है।

ग्रामीणों का दबी जुबान में कहना है कि इस अवैध नेटवर्क को एक दलबदलू नेता का सीधा संरक्षण प्राप्त है। वहीं, राजहरा पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की गाड़ियां सायरन बजाते हुए मोहल्ले से गुजर तो जाती हैं, लेकिन इस अवैध कारोबार पर कोई ठोस असर नहीं पड़ता। हाल ही में बालोद पुलिस अधीक्षक द्वारा दिए गए कड़े निर्देशों के जवाब में भी पुलिस महकमे ने सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर वरिष्ठ अधिकारियों को सब कुछ ठीक होने का भ्रम दे दिया, जबकि धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
युवा पीढ़ी के भविष्य पर गहराता संकट
अवैध मदिरा की सहज उपलब्धता का सबसे दुखद और दूरगामी परिणाम गांव के युवाओं पर देखने को मिल रहा है। बिना किसी नियम-कायदे के धड़ल्ले से जारी इस नशे की लत में फंसकर कई होनहार युवा अपनी पढ़ाई और रोजगार से दूर होते जा रहे हैं। न केवल उनका स्वास्थ्य गिर रहा है, बल्कि समाज में उनका सम्मान भी घट रहा है। गांव में अचानक स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या और बेरोजगारी की दर में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही, युवा पारिवारिक कर्तव्यों से मुंह मोड़ रहे हैं। ग्रामीणों को डर है कि यदि समय रहते इस सामाजिक बुराई पर लगाम नहीं कसी गई, तो गांव का आर्थिक और सामाजिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
टूटते परिवार और घरेलू अशांति
नशे के इस दंश ने परिवारों की खुशहाली को भी लील लिया है। अत्यधिक मदिरापान के कारण घरों में रोज-रोज के झगड़े, मानसिक यंत्रणा और घरेलू हिंसा के मामले सामने आ रहे हैं। कई परिवार लगातार हो रहे क्लेश के कारण आर्थिक तंगी और मानसिक अवसाद के शिकार हो चुके हैं। घर-परिवारों का सुख-चैन छिन जाने से महिलाओं और बच्चों का जीवन नरक समान हो गया है।
नेताओं की चुप्पी और प्रशासन की अनदेखी
स्थानीय निवासियों ने खुलकर आरोप लगाया है कि इस गैर-कानूनी गतिविधि के पीछे गांव के ही कुछ प्रभावशील राजनीतिक चेहरों का हाथ है। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस—दोनों ही प्रमुख दलों के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान देने की जहमत नहीं उठाई। नेताओं की इस रहस्यमयी खामोशी और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता से जनता का कानून और व्यवस्था पर से विश्वास पूरी तरह उठता जा रहा है।
ग्रामीणों की मांग और चेतावनी
क्षेत्र के बिगड़ते हालात को देखते हुए ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और पुलिस प्रशासन से अविलंब कड़े कदम उठाने की गुहार लगाई है। स्थानीय नागरिकों की प्रमुख मांगे इस प्रकार हैं:
- तत्काल सख्त कार्रवाई : गैरेजपारा मोहल्ले में अवैध शराब व अन्य नशीले पदार्थों के विक्रय पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और इसमें लिप्त अपराधियों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाए जाएं।
- जन-जागरूकता अभियान : युवाओं को नशे के सामाजिक व शारीरिक दुष्प्रभावों से बचाने के लिए गांव-गांव में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
- पुनर्वास व रोजगार : नशे की दलदल में फंस चुके युवाओं के उपचार व सुधार हेतु पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाएं और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रोजगार के नए अवसर मुहैया कराए जाएं।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने जल्द ही कोई ठोस और असरदार कार्रवाई नहीं की, तो गांव की शांति व सुरक्षा पूरी तरह नष्ट हो जाएगी, जिसके लिए पूर्णतः प्रशासनिक ढिलाई और राजनीतिक संरक्षण जिम्मेदार होगा।




