प्रशासनिक अनदेखी से बारूद के ढेर पर सज गया पटाखा बाजार, नियमों को ताक पर रखकर हादसे को दे रहे बुलावा

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। त्योहारों के मौसम में जहां पूरा शहर रोशनी और खुशियों से सराबोर होने की तैयारी में है, वहीं बालोद और दल्ली राजहरा का पटाखा बाजार सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर किसी बड़े हादसे की आहट दे रहा है। जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग द्वारा जारी की गई एडवाइजरी और सुरक्षा गाइडलाइंस की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बालोद शहर के मध्य स्थित सरदार पटेल मैदान और दल्ली राजहरा के घने रहवासी इलाके में बने बीएसपी 2 नंबर स्कूल मैदान में सजी अस्थायी दुकानों में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। हर साल इसी तरह नियमों का उल्लंघन होता है और जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानकर भी अनजान बने रहते हैं। प्रशासनिक लापरवाही के इस आलम से ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं।

सुरक्षा मानकों की सरेआम अनदेखी
जिला अग्निशमन अधिकारी और नगर सेना की ओर से 2 नवंबर को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे कि पटाखा दुकानें किसी भी स्थिति में कपड़े, बांस, रस्सी, प्लास्टिक या टेंट जैसी ज्वलनशील सामग्रियों से नहीं बनाई जाएंगी। सुरक्षा के लिहाज से दुकानों के निर्माण में सिर्फ अ-ज्वलनशील सामग्री (जैसे टीन शेड) का उपयोग किया जाना अनिवार्य है। इसके अलावा, दो दुकानों के बीच कम से कम तीन मीटर की सुरक्षित दूरी रखना और दुकानों को आमने-सामने न लगाना अनिवार्य किया गया था।
इसके बावजूद, सरदार पटेल मैदान और दल्ली राजहरा में नियमों को दरकिनार कर बांस, बल्लियों और प्लास्टिक के शामियानों में बेधड़क पटाखा कारोबार चल रहा है। दुकानें एक-दूसरे से सटाकर लगाई गई हैं। ऐसे में यदि किसी एक दुकान में गलती से भी चिंगारी सुलगती है, तो पूरे बाजार में आग फैलने और बड़े पैमाने पर पटाखों में विस्फोट होने का भयंकर खतरा बना हुआ है।

आग बुझाने के इंतजाम सिर्फ कागजों तक सीमित
अग्निशमन विभाग के नियमों के अनुसार, सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रत्येक दुकान में न्यूनतम 5 किलोग्राम क्षमता का डीसीपी अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) होना आवश्यक है। साथ ही, दुकानों के पास निर्धारित दूरी पर 500 लीटर पानी से भरे ड्रम और बाल्टियों की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि आपात स्थिति में आग पर तुरंत काबू पाया जा सके।
हालांकि, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। बाजार में अधिकांश दुकानों पर अग्निशामक यंत्र नदारद हैं, और जहां हैं भी, वहां पानी के ड्रम या बाल्टियों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। आपात स्थिति में इन उपकरणों का सही इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात हैं या नहीं, इस पर भी गहरा संशय बना हुआ है।

प्रतिबंधित क्षेत्रों में वाहनों की कतारें
दमकल वाहनों के सुगम आवागमन और आपातकालीन स्थिति में लोगों की सुरक्षित निकासी के लिए पटाखा दुकानों के आसपास वाहनों की पार्किंग को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया था। लेकिन ज़मीनी स्तर पर इस नियम का कोई असर नहीं दिख रहा है। दुकानों के ठीक सामने दोपहिया और चार पहिया वाहन बेरोकटोक पार्क किए जा रहे हैं। दीपावली के मौके पर बाजार में भारी भीड़ उमड़ती है, ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है तो तंग रास्तों और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण दमकल की गाड़ियों का मौके पर पहुंचना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

आवासीय और संवेदनशील इलाकों में लगा बाजार
बालोद और दल्ली राजहरा के इन बाजारों के आसपास निजी मकान, स्कूल, मंदिर, दुकानें और अन्य शासकीय भवन स्थित हैं। नियम कहते हैं कि दुकानों के 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी का प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही, ट्रांसफार्मर या हाईटेंशन लाइन के नीचे दुकानें न लगाने और बिजली कनेक्शन में फ्यूज या सर्किट ब्रेकर के इस्तेमाल का निर्देश दिया गया है। फिर भी, संवेदनशील और घनी आबादी वाले इलाकों में बिना पुख्ता सुरक्षा के पटाखा बाजार सजा दिया गया है।

पूर्व की चेतावनियों को भी किया नजरअंदाज
यह कोई पहला मौका नहीं है जब इन स्थानों पर पटाखा बाजार लगाने को लेकर सवाल उठे हैं। पूर्व में यातायात विभाग भी सीएमओ (मुख्य नगरपालिका अधिकारी) को पत्र लिखकर मैदान में पटाखा दुकान लगाने पर गहरी आपत्ति जता चुका है और स्थान परिवर्तन की सिफारिश कर चुका है। स्थानीय नागरिकों ने भी सुरक्षा कारणों से आपत्ति उठाई थी। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी प्रशासनिक अधिकारियों ने पुराने अनुभवों से कोई सबक नहीं लिया और उसी जोखिम भरे स्थान पर कारोबार की अनुमति दे दी।
प्रशासन का रटा-रकाया आश्वासन
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बालोद के अपर कलेक्टर सुरेंद्र कुमार वैद्य ने कहा कि पटाखा दुकानों के लाइसेंस का नवीनीकरण नियमों के तहत ही किया गया है और सभी संचालकों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि कहीं भी गाइडलाइंस का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित एसडीएम और तहसीलदार को जांच कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, किसी अन्य व्यक्ति के लाइसेंस पर अवैध रूप से दुकान चलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, अधिकारियों के ये आश्वासन हर साल दोहराए जाते हैं, जबकि धरातल पर नियमों की धज्जियां उड़ती रहती हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन सिर्फ कागजी जांच तक सीमित रहता है या समय रहते सख्त कदम उठाकर किसी भावी दुर्घटना को रोकता है।




