विश्वास की आड़ में दरिंदगी : रायपुर में 8 साल की मासूम से हैवानियत की कोशिश, पिता का दोस्त सुलेमान कुरैशी सलाखों के पीछे…

रायपुर। राजधानी के टिकरापारा थाना अंतर्गत संतोषी नगर इलाके में इंसानियत और भरोसे को तार-तार कर देने वाला शर्मनाक मामला सामने आया है। घर में घुसकर 8 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ कथित यौन अपराध करने के आरोप में पुलिस ने 30 वर्षीय सुलेमान कुरैशी को गिरफ्तार किया है। आरोपी कोई अजनबी नहीं, बल्कि पीड़िता के पिता का परिचित और दोस्त निकला, जिसने घर की चौखट पर मिले भरोसे का बेहद घिनौना फायदा उठाया।
विश्वासघात की पटकथा : चिप्स का लालच देकर की हैवानियत – पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे की है। दोपहर के सन्नाटे में आरोपी सुलेमान पीड़िता के घर पहुंचा। परिवार का पुराना परिचित होने और इलाके में ही रहने के कारण घर में उसकी आवाजाही पर किसी को कोई शक नहीं हुआ।
घर के अंदर दाखिल होते ही आरोपी ने अपनी बदनीयत दिखाते हुए 8 साल की बच्ची को चिप्स का पैकेट थमाया। मासूम जब तक कुछ समझ पाती, आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती और अश्लील हरकतें शुरू कर दीं।
मासूम के अदम्य साहस से बेनकाब हुआ दरिंदा – आरोपी ने सोचा था कि 8 साल की बच्ची डर के मारे चुप रहेगी, लेकिन मासूम ने हैवान के सामने घुटने टेकने के बजाय असाधारण साहस दिखाया। बच्ची ने पूरी ताकत से आरोपी का कड़ा विरोध किया और खुद को उसके चंगुल से छुड़ाकर बाहर भागी। इसके बाद उसने बिना डरे रोते हुए अपने परिजनों को आरोपी की पूरी करतूत बयां कर दी। बच्ची की आपबीती सुनकर परिजनों के होश उड़ गए और इलाके में आक्रोश फैल गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई : चंद घंटों में दबोचा गया आरोपी – परिजनों ने तुरंत टिकरापारा थाने पहुंचकर लिखित तहरीर दी। नाबालिग बच्ची से जुड़ा गंभीर मामला होने के कारण पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस ने बिना कोई वक्त गंवाए विशेष टीम गठित की और दबिश देकर आरोपी सुलेमान कुरैशी (30 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया।
- पॉक्सो एक्ट के तहत संगीन धाराएं : पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की कड़ी धाराओं और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के संबंधित गैर-जमानती प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया है।
- साक्ष्य संकलन और मेडिकल जांच : पुलिस ने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए बच्ची का चिकित्सीय परीक्षण कराया है और बाल कल्याण समिति (CWC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि अदालत में आरोप पुख्ता साबित हो सकें।
पहचान पूरी तरह गोपनीय – नाबालिग से जुड़े अपराधों में कानूनी नियमों और नैतिकता का पालन करते हुए पीड़िता और उसके परिवार की पहचान से जुड़ी कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। टिकरापारा पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में फोरेंसिक और कानूनी साक्ष्य जुटाकर जल्द से जल्द अदालत में चालान पेश किया जाएगा ताकि आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।




