खाकी के शिकंजे में टूटी सांसें : जांजगीर-चांपा में पुलिस कस्टडी में युवक की मौत, थाने का घेराव; SP ने आरक्षक को किया सस्पेंड…

जांजगीर-चांपा। जिले में पुलिस हिरासत में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अवैध शराब जब्ती के मामले में चांपा पुलिस द्वारा उठाए गए युवक की इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने चांपा थाने का घेराव कर जमकर हंगामा किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने तत्काल प्रभाव से आरक्षक ईश्वरी राठौर को निलंबित कर दिया है, वहीं पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
- हिरासत : चांपा पुलिस ने बुधवार को मेंहदीपारा निवासी कुल्लू उर्फ शिव सहिस को अवैध शराब बिक्री (आबकारी अधिनियम की धारा 34(2)) के संदेह में पकड़ा था।
- अस्पताल में भर्ती : पुलिस का दावा है कि थाने में पूछताछ के दौरान बुधवार शाम को अचानक युवक की तबीयत बिगड़ गई। उसे तत्काल चांपा के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया।
- रेफर और मौत : चांपा से गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जांजगीर जिला अस्पताल रेफर कर दिया, जहां गुरुवार सुबह लगभग 8:00 बजे इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों का सीधा आरोप : थर्ड डिग्री टॉर्चर से गई जान – सुबह युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। सैकड़ों की संख्या में मोहल्लेवासी और परिजन चांपा थाने पहुंच गए और मुख्य द्वार को घेरकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
परिजनों का स्पष्ट आरोप है :
- हिरासत के दौरान युवक के साथ बेरहमी से मारपीट और थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया।
- युवक पूरी तरह स्वस्थ था, लेकिन पुलिसिया प्रताड़ना के चलते उसकी जान गई।
- परिजनों ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (कस्टोडियल डेथ) का मामला दर्ज करने और पूरे स्टाफ पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस का पक्ष और प्रशासनिक कार्रवाई – थाने के घेराव और बढ़ते तनाव को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों को शांत कराने की कोशिश की।

- एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने पर आरक्षक ईश्वरी राठौर को सस्पेंड कर दिया है।
- पुलिस प्रशासन का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी।
- कस्टोडियल डेथ से जुड़े राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के तहत शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम डॉक्टरों की विशेष टीम द्वारा वीडियोग्राफी के साथ कराया जा रहा है।
हिरासत में मौत की इस घटना ने एक बार फिर कानून के रखवालों की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए स्थिति पर वरिष्ठ अधिकारी नजर बनाए हुए हैं।



