रायगढ़

लैलूंगा : राजपुर पंचायत में विकास के नाम पर ‘कागजी खेल’: बिना छत ढले ही सामुदायिक भवन का निकाल लिया पूरा पैसा, सचिव पर फर्जी आहरण और गबन का सनसनीखेज आरोप…

  • कलेक्टर जनदर्शन में गूंजी भ्रष्टाचार की गूंज; जनपद सदस्य सदानंद निषाद ने खोला मोर्चा, सचिव परीक्षित भोय पर सरकारी खजाने की खुली लूट का आरोप, तत्काल निलंबन और उच्च स्तरीय जांच की उठी मांग।…

रायगढ़। जिले के ग्राम पंचायत राजपुर में विकास योजनाओं की आड़ में सरकारी राशि की खुली बंदरबांट और संगठित भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। विकास के नाम पर शासन से मिलने वाली जनता की गाढ़ी कमाई पर पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा बेखौफ डाका डालने का आरोप लगा है। इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब जनपद पंचायत क्षेत्र क्रमांक 07 के जनपद सदस्य सदानंद निषाद ने ठोस दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ सीधे जिला कलेक्टर के जनदर्शन में दस्तक देकर पूरे सिंडिकेट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

जनपद सदस्य ने ग्राम पंचायत सचिव परीक्षित भोय पर अपनी पदस्थापना के पहले ही दिन से शासकीय राशि का खुलेआम दुरुपयोग करने, पद का नाजायज फायदा उठाने और फर्जी बिल-वाउचरों के सहारे सरकारी खजाने को लाखों-करोड़ों की चपत लगाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

कागजों में चमचमाती इमारत, धरातल पर सिर्फ अधूरा ढांचा – ​शिकायत में सबसे हैरान करने वाला खुलासा सरस्वती शिशु मंदिर के पास स्वीकृत सामुदायिक भवन के निर्माण में सामने आया है। आरोप है कि मौके पर निर्माणाधीन भवन की छत की ढलाई तक नहीं हुई है और ढांचा लावारिस हालत में अधूरा खड़ा है। इसके बावजूद जिम्मेदार सचिव और सरपंच की मिलीभगत से कागजों पर निर्माण कार्य को 100% पूर्ण दर्शा दिया गया।

​धरातल पर अधूरा काम होने के बाद भी फर्जी तरीके से ‘कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र’ (Completion Certificate) जारी कर सरकारी खजाने से पूरी स्वीकृत राशि का आहरण कर लिया गया। मौके की बदहाली यह साबित करने के लिए काफी है कि पंचायत में भ्रष्टाचार किस कदर हावी है।

पगडंडी से लेकर स्ट्रीट लाइट तक में फर्जी बिलों का बोलबाला – ​जनपद सदस्य ने शिकायती पत्र में बिंदुवार खुलासे करते हुए बताया कि पंचायत में कराए गए तमाम निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली हुई है:

  • कागजी पगडंडी निर्माण: कई पगडंडी निर्माण कार्यों के नाम पर जमीन पर एक ईंट भी नहीं रखी गई, लेकिन कागजी घोड़े दौड़ाकर पूरी राशि डकार ली गई।
  • स्ट्रीट लाइट घोटाला: गांव की गलियों में लाइट लगाने के नाम पर बिना किसी कार्य विवरण और बिना वैध बिल-वाउचर के मनमाने तरीके से भुगतान कर राशि का गबन किया गया।
  • प्रभाव का दुरुपयोग: आरोप है कि शासन और प्रभारी मंत्री के नाम व प्रभाव की आड़ लेकर नियमों को ताक पर रखकर लगातार फर्जी आहरण का खेल खेला जाता रहा।

ग्रामीणों के सामने ऑडिट और तत्काल निलंबन की मांग – ​जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन से मांग की है कि:

  • ​सचिव परीक्षित भोय के कार्यकाल के दौरान हुए सभी निर्माण कार्यों, आय-व्यय और बिल-वाउचरों का भौतिक सत्यापन व विशेष ऑडिट गांव के आम नागरिकों के समक्ष कराया जाए।
  • ​दागी सचिव को तत्काल प्रभाव से ग्राम पंचायत राजपुर से हटाकर निलंबित किया जाए।
  • ​सरकारी राशि के गबन और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

​कलेक्टर जनदर्शन में पुख्ता साक्ष्यों के साथ हुई इस शिकायत के बाद अब सबकी नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले जिम्मेदारों पर कब तक कानूनी शिकंजा कसा जाता है।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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