CM के गृह जिले में सिस्टम की पोल: टपकती छत पर तिरपाल, फर्जी हाजिरी और चूल्हे पर पकती बदहाली…

जशपुर। मुख्यमंत्री के अपने गृह जिले जशपुर में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत का खौफनाक फासला ग्राम पंचायत तमता के शासकीय प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास में खुलकर सामने आ गया है। जहाँ बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखी जानी थी, वहाँ नौनिहाल टपकती छत, ओवरफ्लो होते सेप्टिक टैंक और धुएं के बीच बुनियादी हक के लिए तरस रहे हैं।
तिरपाल के सहारे ‘सुरक्षा’, बदबू के बीच रहने की मजबूरी – छात्रावास भवन इतना जर्जर हो चुका है कि बारिश का पानी रोकने के लिए छत पर तिरपाल बांधनी पड़ रही है। किसी भी वक्त बड़े हादसे का अंदेशा बना हुआ है। शौचालयों की स्थिति नारकीय है—सेप्टिक टैंक ओवरफ्लो होकर सड़ांध मार रहा है, जिससे मासूमों के बीच गंभीर संक्रमण और महामारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है।
हाजिरी में खेल, बजट का ‘अदृश्य’ बंदरबांट? – 50 सीटों की क्षमता वाले इस छात्रावास में भौतिक रूप से महज 30 से 35 बच्चे ही मौजूद मिलते हैं। आरोप है कि उपस्थिति पंजी में फर्जी तरीके से पूरी संख्या दर्ज कर सरकारी राशन और फंड का खेल चल रहा है।
मीनू का मखौल, गैस सिलेंडर छोड़ चूल्हे का धुआं – डिजिटल और हाइटेक दावों के बीच छात्रावास में गैस चूल्हे धूल फांक रहे हैं और बच्चों का खाना आज भी लकड़ी के चूल्हे पर पकाया जा रहा है। शासन द्वारा तय पोषणयुक्त मीनू सिर्फ कागजों तक सीमित है; थाली में न तो पौष्टिक आहार है और न ही समय पर तय नाश्ता।
उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग – मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही का यह आलम देख अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने दो टूक मांग की है कि:
- उपस्थिति रजिस्टर और मौके पर मौजूद बच्चों का तुरंत भौतिक सत्यापन हो।
- राशन, मीनू और फंड के गबन की निष्पक्ष ऑडिट कराई जाए।
- जर्जर भवन व बदहाल व्यवस्था के जिम्मेदार अफसरों पर सीधी दंडात्मक कार्रवाई हो।
जब सूबे के मुखिया के गृह जिले में आदिवासी अंचल के बच्चे तिरपाल के नीचे घुट रहे हों, तो बाकी प्रदेश का क्या हाल होगा? देखना यह है कि प्रशासन इस बदहाली पर कब जागता है या फिर यह मामला भी जांच की फाइलों में दबा दिया जाएगा।




