विशेष रिपोर्ट : चिमटापानी घाट में ‘रफ्तार का तांडव’, जशपुर DSP बने फरिश्ते – आखिर कब थमेगा मौतों का सिलसिला?…

रायगढ़। रायगढ़-लैलूंगा मार्ग पर स्थित चिमटापानी (चिपटापानी) घाट एक बार फिर निर्दोषों के खून से लाल हो गया। रूह कंपा देने वाले हादसे ने प्रशासन के दावों और यातायात सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है। तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से बैसकीमुड़ा निवासी एक दंपत्ति की जिंदगी अब अस्पताल के बिस्तरों पर संघर्ष कर रही है।
घटनाक्रम : जब ‘यमराज’ बनकर दौड़ा अनियंत्रित ट्रक – प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लैलूंगा की ओर जा रहा एक भारी मालवाहक ट्रक घाट की ढलान और मोड़ पर काल की गति से दौड़ रहा था। चालक ने घाट के खतरनाक अंधे मोड़ पर वाहन से पूरी तरह नियंत्रण खो दिया। इसी दौरान सामने से आ रही एक कार (जिसमें दंपत्ति सवार थे) को ट्रक ने इतनी जोरदार टक्कर मारी कि कार के परखच्चे उड़ गए।
टक्कर का शोर इतना भीषण था कि आसपास के ग्रामीण और राहगीर सहम गए। कार के अगले हिस्से का लोहा मुड़कर दंपत्ति के शरीर में धंस गया था, जिससे उन्हें निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
घायलों की स्थिति : पति की हालत अत्यंत नाजुक – हादसे में घायल पत्नी के हाथ और पैर में कई जगह मल्टीपल फ्रैक्चर आए हैं। वहीं, उनके पति की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है; उनके सीने और पैर में गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्राथमिक उपचार के बाद, डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल रायगढ़ जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
देवदूत बनकर पहुंचे जशपुर पुलिस के अधिकारी : इस हृदयविदारक घटना के बीच मानवीय संवेदना की एक बड़ी मिसाल देखने को मिली। जशपुर जिले के DSP (सुरक्षा/ट्रैफिक) श्री के.आर. चौहान और रक्षित निरीक्षक (RI) श्री अमरजीत खूँटे अपने स्टाफ के साथ उसी मार्ग से गुजर रहे थे। दुर्घटना देखते ही उन्होंने बिना एक पल गंवाए अपना प्रोटोकॉल छोड़ा और लहूलुहान दंपत्ति को अपने ही सरकारी वाहन में लादकर अस्पताल पहुंचाया।
“अगर पुलिस अधिकारी तत्काल मदद न करते, तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।” – मौके पर मौजूद ग्रामीण
चिमटापानी घाट : प्रशासन की लापरवाही का ‘डेथ पॉइंट’ – यह कोई पहली घटना नहीं है। चिमटापानी घाट क्षेत्र अब ‘किलर जोन’ में तब्दील हो चुका है। स्थानीय लोगों का आक्रोश अब फूट पड़ा है, उनके अनुसार:
- रफ्तार पर कोई लगाम नहीं : भारी वाहन घाट की ढलान पर इंजन बंद कर या न्यूट्रल में गाड़ी चलाते हैं, जिससे ब्रेक फेल होने और नियंत्रण खोने का खतरा बढ़ जाता है।
- संकेतकों का अभाव : घाट के मोड़ पर न तो ‘स्पीड ब्रेकर’ हैं और न ही पर्याप्त रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड।
- पेट्रोलिंग की कमी : घरघोड़ा पुलिस और यातायात विभाग की यहाँ कोई स्थायी मौजूदगी नहीं है, जिससे चालक नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं।
पुलिस की कार्रवाई : हादसे के बाद पुलिस ने दुर्घटनाकारी ट्रक को जब्त कर लिया है और उसे थाने में खड़ा कराया गया है। आरोपी चालक के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस खूनी मार्ग पर हादसों को रोकना है।




