धान खरीदी घोटाले का खुलासा : रिजेक्ट धान पर 11.40 लाख का अनुचित भुगतान, राशि वापस ली

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले की धान खरीदी प्रक्रिया पर अब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। बीज प्रसंस्करण केंद्र झलमला में अस्वीकृत धान को खरीदा दिखाकर एक किसान के खाते में 11 लाख 40 हजार 200 रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। विवाद बढ़ते ही प्रशासन ने तत्काल राशि समपन्न कर ली, लेकिन यह घटना पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ी कर रही है।
देवरी तहसील के खपराभाट गांव के किसान सोहन लाल कश्यप के नाम 10.71 हेक्टेयर जमीन दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज थी। आरोप है कि इसी एक ही रकबे का उपयोग कर किसान ने बीज प्रसंस्करण केंद्र और धान खरीदी केंद्र दोनों जगह धान बेच दिया। इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि जिले में औसत उपज 20-25 क्विंटल प्रति एकड़ होने के बावजूद, यहां 33.76 क्विंटल प्रति एकड़ की रिकॉर्डिंग कर ली गई। यह उत्पादन आंकड़ा सामान्य से कहीं अधिक होने से संदेह गहरा गया।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि दिसंबर 2025 में 1263 बोरी धान भेजी गई थीं, जिनमें से 909 बोरी गुणवत्ता परीक्षण में विफल होकर रिजेक्ट घोषित हो चुकी थीं। विभागीय नियमों के मुताबिक इन्हें किसान को लौटाना अनिवार्य था, मगर कथित तौर पर इन्हें दूसरे टोकन के जरिए खरीदी केंद्र में घुसेड़ दिया गया और भुगतान भी जारी हो गया। इस अनियमितता ने किसानों और स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है।
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रबंधक माधुरी बाला को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। अब कई सवाल उठ रहे हैं— रिजेक्ट धान पर भुगतान किसके संकेत पर हुआ? राशि वापसी की क्या मजबूरी आई? प्रशासन ने गहन जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन यह प्रकरण धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर करारा प्रहार है। किसान संगठन भी हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। जिले में धान खरीदी का सीजन अभी चल रहा है, ऐसे में यह घटना अन्य केंद्रों पर भी निगरानी बढ़ाने का संकेत दे रही है।




