छत्तीसगढ़

सारंगढ़ : पत्रकारिता की आड़ में वसूली का खेल, चेक डैम निर्माण रुकवाने की धमकी देकर सरपंच प्रतिनिधि से ऐंठे हजारों रुपए…

डोंगरीपाली | समाचार सेवा छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पत्रकारिता के नाम पर अवैध वसूली और ब्लैकमेलिंग का एक शर्मनाक मामला उजागर हुआ है। ग्राम पंचायत करपी में सरकारी काम रुकवाने और बदनाम करने की धमकी देकर दो कथित पत्रकारों द्वारा सरपंच प्रतिनिधि को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। पीड़ित ने अब डोंगरीपाली थाने में नामजद शिकायत दर्ज कराकर सुरक्षा और कार्रवाई की गुहार लगाई है।

निर्माण स्थल पर पहुंचकर मचाया उत्पात : शिकायतकर्ता और सरपंच प्रतिनिधि देवेन्द्र नायक ने बताया कि ग्राम पंचायत करपी में शासन की योजना के तहत चेक डैम का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार और क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा मिल सके। बीते 6 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 11 से 12 बजे के बीच दिनेश जायसवाल और सुनील टंडन नामक दो युवक निर्माण स्थल पर पहुंचे। वहां पहुंचते ही वे मोबाइल से फोटो और वीडियो बनाने लगे। जब देवेन्द्र नायक ने उनसे उनका परिचय पूछा और फोटो लेने का कारण जानना चाहा, तो वे उग्र हो गए।

“50 हजार दो, नहीं तो खबर चलाकर कर देंगे बदनाम” – ​पीड़ित के अनुसार, दोनों युवकों ने खुद को बहुत बड़ा पत्रकार बताते हुए रौब झाड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने मजदूरों को काम बंद करने की धमकी दी और कहा कि— “अगर तुम हमें 50,000 रुपए नहीं दोगे, तो हम काम में कमियां निकालकर समाचार चलाएंगे और तुम्हें इतना बदनाम करेंगे कि तुम कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगे।” सरेआम दी जा रही इस धमकी और बदनामी के डर से घबराकर सरपंच प्रतिनिधि ने मौके पर ही दिनेश जायसवाल को 20,000 रुपए दे दिए।

एडिटेड फोटो भेजकर अब भी कर रहे ब्लैकमेल : वसूली की हद तो तब पार हो गई जब 10 फरवरी को आरोपियों ने निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियर किशन पटेल के व्हाट्सएप पर एक ‘एडिटेड’ (छेड़छाड़ की गई) फोटो भेजी। इस फोटो के जरिए दबाव बनाते हुए आरोपियों ने बाकी बचे 30,000 रुपए की मांग की। लगातार मिल रही धमकियों और ब्लैकमेलिंग के इस कृत्य से परेशान होकर सरपंच प्रतिनिधि ने पुलिस की शरण ली है।

ग्रामीणों ने दी गवाही, पुलिस जांच में जुटी : ​इस पूरी घटना के दौरान गांव के राजेश पटेल, उत्तरा निषाद, डोलमणी पटेल, दयाराम पटेल और कैलाश निषाद सहित कई अन्य ग्रामीण वहां मौजूद थे, जिन्होंने आरोपियों की बदतमीजी और वसूली के इस वाकये को अपनी आंखों से देखा है। पुलिस ने आवेदन स्वीकार कर लिया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर कलंक : ​यह मामला उन लोगों के चेहरे को बेनकाब करता है जो आईडी कार्ड गले में लटकाकर विकास कार्यों में अड़ंगा डालते हैं और अवैध वसूली को अपना पेशा बना चुके हैं। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी रोष है और उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे फर्जी पत्रकारों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई सरकारी काम में बाधा न डाल सके।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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