कोरबा

कोरबा में ‘पावर’ पॉलिटिक्स : 1600 MW विस्तार पर ग्रामीणों का ‘ब्रेक’, पुराने वादों की राख से सुलगी विरोध की चिंगारी…

कोरबा। ऊर्जाधानी कोरबा में औद्योगिक विकास और जनहित के बीच एक बार फिर ठन गई है। निजी पावर प्लांट (पूर्व में लैंको) के 1600 मेगावाट के प्रस्तावित विस्तार के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। “पहले पुराना हिसाब, फिर नया विस्तार” के नारे के साथ 9 गांवों के प्रभावितों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से इस लड़ाई में नेतृत्व करने की मांग की है।

वादों की ‘शॉर्ट सर्किट’ : 2005 से अब तक सिर्फ आश्वासन – ग्रामीणों का आक्रोश बेवजह नहीं है। उनका आरोप है कि वर्ष 2005-06 में संयंत्र की स्थापना और फिर 2012-13 में तीसरी-चौथी इकाई के विस्तार के दौरान जो गुलाबी सपने दिखाए गए थे, वे आज भी कागजों पर ही दम तोड़ रहे हैं।

  • रोजगार : प्रभावित परिवार के एक सदस्य को नौकरी का वादा अधूरा।
  • सुविधाएं : चिकित्सा और शिक्षा की बेहतर व्यवस्था का दावा खोखला।
  • पुनर्वास : विस्थापितों के हक में किए गए करार अब तक जमीन पर नहीं उतरे।

750 मकान और 4000 जिंदगियों पर ‘विस्थापन’ की तलवार : ​ग्रामीण पूरन सिंह कश्यप और अश्वनी कुमार तंवर ने चेतावनी दी है कि इस नए विस्तार से सरगबुंदिया, अमलीभांठा, पहंदा, ढनढनी, संडेल, बरीडीह, खोड्डल, दर्राभाठा और पताढ़ी जैसे 9 गांवों का अस्तित्व खतरे में है। लगभग 750 मकान जमींदोज हो जाएंगे और 4000 की आबादी बेघर हो सकती है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे अब दोबारा ‘ठगे’ जाने को तैयार नहीं हैं।

“जब तक प्रबंधन पुराने वादों को लिखित रूप में और वास्तविक रूप से पूरा नहीं करता, तब तक एक इंच जमीन भी अधिग्रहण नहीं करने दी जाएगी।”  ग्रामीणों का सामूहिक संकल्प

पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से हस्तक्षेप की गुहार : ​जनपद सदस्य रीना सिदार के नेतृत्व में ग्रामीणों ने क्षेत्र के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का मानना है कि प्रबंधन की वादाखिलाफी के खिलाफ केवल कड़ा राजनीतिक हस्तक्षेप ही उन्हें न्याय दिला सकता है।

कलेक्ट्रेट में गूंजी विरोध की आवाज : गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर ग्रामीणों की नारेबाजी से गूंज उठा। कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में साफ चेतावनी दी गई है कि जनसुनवाई और अधिग्रहण की किसी भी प्रक्रिया का पुरजोर विरोध किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन को दोटूक कह दिया है कि विकास की कीमत पर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।

मुख्य बिंदु जो खबर को ‘धारदार’ बनाते हैं:

  • 9 प्रभावित गांव : सरगबुंदिया से लेकर पताढ़ी तक का विरोध।
  • बड़ा विस्थापन : 4000 लोगों के भविष्य पर संकट।
  • अल्टीमेटम : बिना पुराने वादों की पूर्ति के नए काम पर रोक।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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