सत्ता का अहंकार या रसूख की सनक? मर्चुरी कर्मचारी पर सरपंच का खौफनाक हमला; दीवार पर सिर पटका, कर्मचारी ICU में!…

कोरबा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल से एक ऐसी हृदयविदारक और आक्रोश पैदा करने वाली खबर सामने आई है, जिसने मानवता और कानून व्यवस्था दोनों को शर्मसार कर दिया है। एक जनप्रतिनिधि, जिस पर समाज की सुरक्षा और सेवा की जिम्मेदारी होती है, वही अस्पताल के भीतर अराजकता का पर्याय बन गया। मामूली सी देरी पर सरपंच ने अपना आपा खोया और एक सरकारी कर्मचारी को मौत के मुहाने पर धकेल दिया।
इंतजार की सजा : लहूलुहान हुआ ‘कोरोना योद्धा’ -घटना तब घटी जब बेंदरकोना गांव के लाल सिंह मंझवार का शव पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था। मर्चुरी में तैनात वरिष्ठ कर्मचारी बालचनैया जब पूरी निष्ठा से अपने कार्य में व्यस्त थे, तब सरपंच जयवीर सिंह ठाकुर ने प्रक्रिया में तत्काल तेजी लाने का दबाव बनाया। बालचनैया के ‘धैर्य रखने’ के अनुरोध पर सरपंच के भीतर का ‘अहंकार’ इस कदर भड़का कि उन्होंने कर्मचारी पर जानलेवा हमला कर दिया।
दीवार से टकराया सिर, थम गई सांसें! – विवाद के दौरान सरपंच ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने बालचनैया का सिर पकड़कर पूरी ताकत से दीवार पर दे मारा। इस हिंसक वार से कर्मचारी के सिर में गंभीर चोट (Brain Hemorrhage जैसी स्थिति) आई और उनके दिमाग में खून का थक्का जम गया। मौके पर मची चीख-पुकार के बीच कर्मचारी को आनन-फानन में ICU वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उनकी स्थिति फिलहाल अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
FIR दर्ज : रसूख के खिलाफ कानून की ललकार – सरकारी कार्य में बाधा डालने और एक कर्मचारी की जान जोखिम में डालने के अपराध में पुलिस ने सरपंच के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अस्पताल के कर्मचारियों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है और उन्होंने आरोपी सरपंच की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
बड़े सवाल:
- क्या वर्दी और पद की धौंस अब बेगुनाह कर्मचारियों की जान लेगी?
- अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस ‘तालिबानी कृत्य’ का जिम्मेदार कौन?
- क्या जिला प्रशासन इस दबंग सरपंच पर ऐसी कार्रवाई करेगा जो नजीर बने?
“जब सेवा करने वाले हाथ ही हिंसा पर उतारू हो जाएं, तो समाज का पतन निश्चित है। बालचनैया आज अस्पताल के बिस्तर पर अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और पूरा कोरबा न्याय की प्रतीक्षा में है।”




