खाकी का कड़ा प्रहार : ग्राहकों की गाढ़ी कमाई डकारने वाला श्रीराम फाइनेंस का ‘जालसाज’ कर्मचारी महासमुंद से गिरफ्तार…

अंबिकापुर। सरगुजा पुलिस ने वित्तीय धोखाधड़ी और गबन के मामले में एक बड़ी सफलता हासिल की है। श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड के ग्राहकों के साथ लाखों की धोखाधड़ी कर फरार चल रहे जूनियर बिजनेस एग्जीक्यूटिव अमित श्रीवास्तव को पुलिस ने महासमुंद से घेराबंदी कर धर दबोचा है। आरोपी ने न केवल कंपनी को चूना लगाया, बल्कि फर्जी रसीदें थमाकर मासूम ग्राहकों के विश्वास का भी कत्ल किया।
फर्जी रसीद और डिजिटल सेंधमारी का खेल – मामले का खुलासा तब हुआ जब श्रीराम फाइनेंस के शाखा प्रबंधक दिग्विजय सिंह ने पुलिस को बताया कि आरोपी अमित श्रीवास्तव (29 वर्ष) ग्राहकों से किस्तों की राशि कंपनी के खाते में जमा कराने के बजाय अपने निजी बैंक खाते में मंगा लेता था।
- कूटरचित दस्तावेज : आरोपी ग्राहकों को गुमराह करने के लिए कंप्यूटराइज्ड पावती के बजाय हाथ से लिखी फर्जी रसीदें देता था।
- DO लेटर का फर्जीवाड़ा : आरोपी ने कई ग्राहकों से डाउन पेमेंट की नगद राशि लेकर फर्जी ‘डिलीवरी ऑर्डर’ (D.O. Letter) जारी किए और एजेंसियों से सीधे वाहन दिलवा दिए।
- कुल गबन : अब तक की जांच में 3,50,395 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है।
पुलिस की ‘स्पेशल स्ट्राइक’ – मामले की गंभीरता को देखते हुए DIG एवं SSP सरगुजा श्री राजेश कुमार अग्रवाल (IPS) ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए थे। नगर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन और कोतवाली थाना प्रभारी शशिकांत सिन्हा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी सुरागों का पीछा करते हुए पुलिस टीम महासमुंद पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
पूछताछ में खुले कई राज – गिरफ्तारी के बाद आरोपी अमित श्रीवास्तव ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। हालांकि, जब पुलिस ने सरगुजा हीरो केयर से फाइनेंस हुई 22 गाड़ियों के दस्तावेजों के बारे में सवाल किए, तो आरोपी गोलमोल जवाब देने लगा। पुलिस को अंदेशा है कि जांच आगे बढ़ने पर गबन का यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।
अपराध का विवरण एक नजर में :
- आरोपी : अमित श्रीवास्तव (पिता: आनंद श्रीवास्तव), निवासी: गोधनपुर, अंबिकापुर।
- धाराएं : 316(4), 316(5) BNS (भारतीय न्याय संहिता)।
- पुलिस टीम : निरीक्षक शशिकान्त सिन्हा, सउनि संदीप सिंह, प्रधान आरक्षक विजय रवि, आरक्षक सत्येंद्र दुबे, ओमप्रकाश गुप्ता एवं टीम।
पुलिस की अपील : किसी भी फाइनेंस कंपनी की किस्त जमा करते समय हमेशा आधिकारिक और कंप्यूटराइज्ड रसीद ही प्राप्त करें। किसी भी कर्मचारी के निजी खाते में पैसा ट्रांसफर न करें।




