रायपुर

सावधान! रायपुर के अंजनी टावर में चल रहा था ठगी का ‘अहमदाबादी खेल’, डमी चेक और चाइनीज ऐप्स के जरिए विदेशी नागरिकों की गाढ़ी कमाई पर डाका, 42 गिरफ्तार…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में बैठकर सात समंदर पार अमेरिका और चीन के नागरिकों को चूना लगाने वाले एक बड़े इंटरनेशनल सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। गुजरात के दो शातिर दिमागों ने रायपुर के पॉश इलाकों को अपना ‘हब’ बनाया और महज 12वीं पास युवाओं के हाथों में ‘हिंदी में लिखी अंग्रेजी स्क्रिप्ट’ थमाकर करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया।

​26 मार्च को रायपुर पुलिस ने गंज और राजेंद्र नगर थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर 42 आरोपियों को धर दबोचा है, हालांकि मास्टरमाइंड अब भी फरार हैं।

ठगी का ‘अहमदाबादी’ मॉडल : रायपुर में ऑफिस, अमेरिका में टारगेट – इस पूरे खेल के पीछे अहमदाबाद निवासी विकास शुक्ला और संजय शर्मा का हाथ है। इन्होंने रायपुर के पिथालिया कॉम्प्लेक्स और अंजनी टावर में दफ्तर किराए पर लिए थे। मास्टरमाइंड खुद रायपुर में नहीं रुकते थे; वे गुजरात से आकर केवल टारगेट सेट करते और मैनेजरों को निर्देश देकर गायब हो जाते थे।

कैसे चलता था ‘रात का काला कारोबार’? –  ठगी का यह कारखाना भारतीय समयानुसार रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक चलता था, ताकि अमेरिका के वर्किंग आवर्स (दिन के समय) का फायदा उठाया जा सके।

  • डेटा चोरी : आरोपियों के पास अमेरिकी बैंकों से लोन लेने वालों का पूरा डेटा व्हाट्सऐप के जरिए आता था।
  • डर का कारोबार : ठग कॉल करके अमेरिकियों को डराते थे कि उनका CIBIL स्कोर खराब हो गया है या उनके खातों से ‘फ्रॉड ट्रांजेक्शन’ हुआ है।
  • चाइनीज कनेक्शन : बैंक डिटेल्स हासिल करने के बाद, चाइनीज ऐप्स के जरिए ऑनलाइन चेक जनरेट किए जाते थे और पलक झपकते ही डॉलर पार कर दिए जाते थे।

हिंदी स्क्रिप्ट से ‘फेक’ अंग्रेज बने छत्तीसगढ़ी युवा – हैरानी की बात यह है कि कॉल सेंटर में काम करने वाले युवाओं को अंग्रेजी का ‘ए’ भी ठीक से नहीं पता था। उन्हें कागज पर हिंदी में लिखकर दिया जाता था कि अंग्रेजी में क्या और कैसे बोलना है।

जैसे: “हेलो, आई एम कॉलिंग फ्रॉम योर बैंक” को कागज पर हिंदी में लिखा जाता था। अगर मामला पेचीदा होता, तो कॉल तुरंत 30 हजार की सैलरी वाले ‘सीनियर’ को ट्रांसफर कर दी जाती थी।

सैलरी स्ट्रक्चर और गिरफ़्तारी – पुलिस ने रोहित यादव, सौरभ सिंह और गौरव यादव नाम के तीन मैनेजरों को गिरफ्तार किया है। इस सिंडिकेट में वेतन का खेल कुछ इस तरह था:

  • इंचार्ज/मैनेजर: ₹30,000 प्रति माह
  • कॉलर (12वीं पास युवा): ₹15,000 से ₹20,000 प्रति माह

पुलिस की रडार पर ‘पाम बेलागियो’ का लग्जरी फ्लैट – ठगों ने न केवल ऑफिस बल्कि ‘पाम बेलागियो’ में एक बेहद महंगा फ्लैट भी ले रखा था, जिसका इस्तेमाल रणनीतियां बनाने के लिए किया जाता था। रायपुर पुलिस अब गुजरात पुलिस के संपर्क में है ताकि फरार मुख्य आरोपियों विकास शुक्ला और संजय शर्मा को सलाखों के पीछे लाया जा सके।

सावधान: यह मामला चेतावनी है कि ठगी के गिरोह अब स्थानीय युवाओं की बेरोजगारी का फायदा उठाकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय अपराध की आग में झोंक रहे हैं।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!