बिलासपुर में सड़कों पर ‘काल’ बनकर दौड़ रहा नशा : अब एक्सीडेंट में मौत हुई तो दर्ज होगा गैर-इरादतन हत्या का केस…

बिलासपुर। न्यायधानी में बेलगाम होती सड़क दुर्घटनाओं ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। सड़कों पर बढ़ते खून के निशानों को देखते हुए एसएसपी रजनेश सिंह ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि नशे की हालत में वाहन चलाते समय दुर्घटना हुई और किसी की जान गई, तो आरोपी चालक पर सीधे गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मुकदमा चलेगा।
खौफनाक आंकड़े : मौत की रफ्तार हुई दोगुनी – इस साल बिलासपुर की सड़कों पर मौत का तांडव पिछले साल के मुकाबले दोगुना हो चुका है। जारी आंकड़ों के अनुसार:
- इस साल (अब तक) : 71 मौतें
- पिछले साल (समान अवधि) : 33 मौतें
नोट : ये आंकड़े दर्शाते हैं कि जिले में सड़क सुरक्षा की स्थिति कितनी चिंताजनक हो चुकी है। नशे में धुत्त चालकों के कारण न केवल मासूमों की जान जा रही है, बल्कि ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को बीमा क्लेम (Insurance Claim) तक नहीं मिल पाता।
ताजा हादसे : कहीं टायर फटा, तो कहीं कार बनी खिलौना – पिछले कुछ घंटों में जिले में दो बड़े हादसों ने दहशत फैला दी है:
- पचपेड़ी क्षेत्र : महादेवा तालाब के पास एक बाइक सवार को बचाने के चक्कर में तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके दो भाई जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
- मुंगेली रोड : पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास एक हाइवा का टायर फटने से वह बीच सड़क पर पलट गया। गनीमत रही कि उस वक्त ट्रैफिक कम था, वरना बड़ा नरसंहार हो सकता था।
पुलिस का ‘मेगा एक्शन’ : 1000 वाहन जब्त – सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल के समक्ष एसएसपी ने सख्त रिपोर्ट पेश की।
- अब तक नशे में वाहन चलाने वाले 1000 से अधिक वाहनों को जब्त किया जा चुका है।
- पुलिस का साफ कहना है कि लापरवाही की हद पार हो चुकी है, अब केवल चालान नहीं बल्कि जेल की सलाखें इंतजार कर रही हैं।
सिर्फ नशा ही नहीं, सिस्टम भी जिम्मेदार? – हादसों से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने प्रशासन को आईना दिखाते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं :
- जर्जर सड़कें और अंधे मोड़ : कई जगह सड़कें जानलेवा गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं।
- संकेतकों का अभाव : सड़कों पर जरूरी रेडियम बोर्ड और इंडिकेटर गायब हैं।
- आवारा मवेशी : सड़कों के बीच बैठे मवेशी हाई-स्पीड वाहनों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ साबित हो रहे हैं।
संपादकीय अपील : सड़कों पर होने वाली ये मौतें ‘हादसा’ नहीं, बल्कि ‘सामाजिक हत्या’ हैं। नशे में स्टीयरिंग थामना खुद की और दूसरों की कब्र खोदने जैसा है। पुलिस की सख्ती अपनी जगह है, लेकिन आपकी जागरूकता ही आपको सुरक्षित घर पहुंचा सकती है। याद रखें, घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है।




