रायगढ़ पुलिस का ‘ऑपरेशन क्लीन’ : लैलूंगा के खेतों में उग रहा था ‘काला सोना’, ड्रोन सर्वे से भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार…

रायगढ़। जिले में मादक पदार्थों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और हाई-टेक स्ट्राइक हुई है। जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने लैलूंगा क्षेत्र के ग्राम नवीन घटगांव और मुड़ागांव में छापेमारी कर अवैध अफीम की खेती और भारी मात्रा में स्टॉक का भंडाफोड़ किया है। इस पूरी कार्रवाई में पुलिस ने 61 किलो से अधिक अफीम (पोस्त) जब्त की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है।
ड्रोन कैमरों ने खोला राज: दुर्गम इलाकों में छिपी थी अफीम – तमनार के आमाघाट में हुई पिछली बड़ी कार्रवाई के बाद एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के निर्देश पर पुलिस ने लैलूंगा के जंगलों और खेतों में ड्रोन सर्वे शुरू किया था। सैटेलाइट और ड्रोन इनपुट के आधार पर जब पुलिस की टीम ‘नवीन घटगांव’ पहुंची, तो वहां के नज़ारे ने सबको चौंका दिया। धान और सब्जी की आड़ में किसान अफीम की अवैध खेती कर रहे थे।
तीन अलग-अलग FIR: कौन हैं ये ‘अफीम के सौदागर’? – पुलिस ने इस मामले में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर तीन आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है :
आरोपी: साधराम नागवंशी (60 वर्ष) – FIR No. 94/2026
- लोकेशन: ग्राम नवीन घटगांव।
- बरामदगी: 2 डिसमिल जमीन पर अफीम की खेती। मौके से 600 जीवित पौधे (43 किग्रा), 6.100 किग्रा सूखे पत्ते और 16 किग्रा सूखे डंठल बरामद।
- कुल मूल्य: लगभग 1.13 करोड़ रुपये।
- खुलासा: आरोपी ने कबूल किया कि कम समय में ‘अमीर’ बनने के लालच में उसने पत्थलगांव बाजार से बीज खरीदकर दिसंबर में इसकी बुवाई की थी।
आरोपी: अभिमन्यु नागवंशी (20 वर्ष) – FIR No. 95/2026
- लोकेशन: नवीन घटगांव (पुश्तैनी भूमि)।
- बरामदगी: 14 किलोग्राम अफीम की सूखी फसल (डंठल, पत्ता और फूल)।
- कार्रवाई: जब पुलिस पहुंची, तो 20 साल का यह युवक साक्ष्य मिटाने की कोशिश कर रहा था, जिसे पुलिस ने घेराबंदी कर दबोच लिया। इसकी कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है।
आरोपी: तानसिंह नागवंशी (32 वर्ष) – FIR No. 96/2026
- लोकेशन: ग्राम मुड़ागांव (खुर्सीडीपा)।
- बरामदगी: 4 किलोग्राम अफीम पोस्त।
- मोडस ऑपरेंडी: तानसिंह ने पुलिस को बताया कि बारिश की वजह से फसल अच्छी नहीं हुई, इसलिए उसने पौधों को काटकर बोरियों में भरकर खेत किनारे छिपा दिया था ताकि मौका मिलते ही उसे खपा सके।
संयुक्त टीम की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ : इस मिशन में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि राजस्व विभाग, कृषि विभाग, आबकारी और ANTF (Anti-Narcotics Task Force) के अधिकारी भी शामिल थे। तहसीलदार और पटवारियों ने मौके पर ही जमीन का सीमांकन किया, जबकि FSL (फॉरेंसिक) यूनिट ने पौधों का वैज्ञानिक परीक्षण कर अफीम होने की पुष्टि की।
एसएसपी का कड़ा संदेश : वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जिले में मादक पदार्थों की खेती या तस्करी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे अपने आसपास होने वाली ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को दें।
अगला कदम : ‘बैकवर्ड लिंकेज’ की तलाश – पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन ग्रामीणों को अफीम के बीज मुहैया कराने वाले मुख्य सरगना कौन हैं। क्या छत्तीसगढ़ के इन शांत गांवों को किसी बड़े ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा बनाया जा रहा है? विवेचना जारी है।




