रायगढ़ को ‘बाल विवाह मुक्त’ बनाने का संकल्प: जिला स्तरीय कार्यशाला में कानूनी प्रावधानों पर हुआ गहन मंथन…

रायगढ़। महिला एवं बाल विकास विभाग, रायगढ़ द्वारा ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ अभियान के अंतर्गत नगर पालिक निगम ऑडिटोरियम में एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का गरिमामय आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा का पूर्णतः उन्मूलन करना और संबंधित अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों के प्रति सशक्त बनाना था।
प्रशासनिक मार्गदर्शन और विधिक जागरूकता : यह कार्यशाला कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशानुसार एवं जिला पंचायत सीईओ श्री अभिजीत बबन पठारे के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ के स्टेट कोऑर्डिनेटर श्री विपिन ठाकुर ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, किशोर न्याय अधिनियम 2015 तथा पॉक्सो एक्ट 2012 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि कानूनी जानकारी और त्वरित जमीनी कार्रवाई से ही बच्चों के अधिकारों का संरक्षण संभव है।
उपलब्धियां और आगामी लक्ष्य : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती अंकिता मुदलियार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि:
- रायगढ़ जिले की 282 ग्राम पंचायतें अब तक बाल विवाह मुक्त घोषित की जा चुकी हैं।
- शेष 268 पंचायतों को भी निर्धारित समय-सीमा के भीतर इस श्रेणी में लाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रभावी निगरानी तंत्र की रणनीति : शासन के निर्देशों के अनुरूप, आगामी रामनवमी और अक्षय तृतीया के अवसर पर विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
- प्रत्येक ग्राम पंचायत में 12 सदस्यीय निगरानी टीम का गठन।
- विवाह पंजी का अनिवार्य संधारण सुनिश्चित करना।
- समाज प्रमुखों, धार्मिक संस्थानों और पंचायत सचिवों के बीच बेहतर समन्वय।
व्यापक सहभागिता : कार्यशाला में बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, पुलिस विभाग की विशेष किशोर इकाई, शिक्षा विभाग के संकुल प्राचार्य और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित कुल 750 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सभी उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में रायगढ़ को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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