बालोद जिले में शराब दुकानों के 100 मीटर क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले में पर्यावरण संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिला प्रशासन ने सभी शराब दुकानों और उनके आसपास के 100 मीटर दायरे को सिंगल यूज प्लास्टिक से पूरी तरह मुक्त करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह अभियान “प्लास्टिक मुक्त बालोद जिला” के तहत चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य लक्ष्य प्लास्टिक कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को रोकना और स्वच्छता सुनिश्चित करना है। आइए जानते हैं इस पहल की पूरी जानकारी।

बालोद जिला प्रशासन ने पर्यावरण रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी चंद्रकांत कौशिक ने जिला आबकारी अधिकारी को स्पष्ट पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि शराब दुकानों के 100 मीटर परिधि में प्लास्टिक डिस्पोजल, गिलास, प्लेट्स आदि का कोई उपयोग न हो। यह कदम प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और क्षेत्र को स्वच्छ बनाने की दिशा में उठाया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल गंदगी का सामना होगा, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी घटेगा।
जिले की सरकारी कंपोजिट शराब दुकानों से जुड़ी अधिकृत चखना दुकानों पर लंबे समय से प्लास्टिक डिस्पोजल, गिलास, पानी के पाउच और प्लेट्स का खुला उपयोग हो रहा था। अहाता दुकानों के संचालन नियमों में इस पर सख्ती के प्रावधान हैं, लेकिन आबकारी विभाग ने अब तक इसे अनदेखा कर मौन सहमति दे रखी थी। अधिकारियों ने इस मुद्दे पर कोई कार्यवाही नहीं की, जिससे समस्या और गंभीर हो गई। शराब दुकानों के आसपास प्लास्टिक कचरा इकट्ठा होने से सड़कों पर गंदगी का राज कायम था। अब आगे देखना यह है कि चखना दुकान संचालक इस आदेश का नियमत: पालन करते है या नहीं?

प्लास्टिक कचरे से पर्यावरण को नुकसान
सिंगल यूज प्लास्टिक जैसे डिस्पोजल, गिलास, पानी पाउच और प्लेट्स पर्यावरण के लिए घातक हैं। ये सामग्री विघटित नहीं होतीं और मिट्टी-जल को प्रदूषित करती हैं। नालियों में रुकावट पैदा कर बाढ़ का कारण बनती हैं, तथा जानवरों के पेट में फंसकर उनकी मौत का सबब बनती हैं। हवा में जलने पर जहरीली गैसें निकलती हैं, जो सांस संबंधी बीमारियां फैलाती हैं। इससे जैव विविधता नष्ट होती है और मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है। कुल मिलाकर, यह ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करता है, जिसे रोकना अनिवार्य है।
यह पहल न केवल बालोद को प्लास्टिक मुक्त बनाएगी, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बनेगी। आबकारी विभाग को अब नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, उम्मीद है कि जल्द ही क्षेत्र स्वच्छ और हरा-भरा नजर आएगा।




