बड़ा धमाका : फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे ‘कमिश्नर’ की कुर्सी? राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का कड़ा एक्शन!…

रायपुर/ग्वालियर: सरकारी तंत्र में फर्जीवाड़े की जड़ें कितनी गहरी हो सकती हैं, इसका एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने एक रसूखदार अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हड़कंप मचा दिया है। मामला मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग में पदस्थ अपर आबकारी आयुक्त (Additional Excise Commissioner) राजेश हेनरी से जुड़ा है।
क्या है पूरा विवाद? – इंदौर के व्हिसल ब्लोअर राजेंद्र कुमार गुप्ता की शिकायत ने प्रशासन के गलियारों में खलबली मचा दी है। शिकायत के अनुसार :
- राजेश हेनरी पर आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रमाण पत्र बनवाया।
- आरोप है कि इस फर्जी दस्तावेज के जरिए उन्होंने आरक्षण का अनुचित लाभ लिया और सरकारी नौकरी हथियाई।
- शिकायतकर्ता का दावा है कि श्री हेनरी वास्तव में ईसाई समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, फिर भी उन्होंने जनजाति कोटे का इस्तेमाल किया।
आयोग का ‘अल्टीमेटम’ और संवैधानिक हंटर : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अनुच्छेद 338क के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग शुरू कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है :
- 15 दिनों का समय : आयोग ने मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव (आबकारी), छत्तीसगढ़ के प्रधान सचिव (आदिम जाति विकास) और बिलासपुर कलेक्टर को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है।
- समन की चेतावनी : यदि समय सीमा के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो आयोग सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग करते हुए संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन (Summon) जारी कर सकता है।
प्रशासनिक खेमे में हड़कंप : एक वरिष्ठ आईएएस स्तर के अधिकारी (अपर आबकारी आयुक्त) पर लगे इन गंभीर आरोपों ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, दोनों राज्यों की चयन प्रक्रिया और सत्यापन प्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
बड़ा सवाल : क्या इतने ऊंचे पद पर बैठा अधिकारी दशकों तक सिस्टम की आंखों में धूल झोंकता रहा? अब सबकी नजरें बिलासपुर प्रशासन की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो राजेश हेनरी के ‘असली’ वजूद का खुलासा करेगी।




