NGO फंड के नाम पर महिला को बनाया ‘मोहरा’, खाते से पार किए 2.17 करोड़ ; रायगढ़ साइबर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक!…

- ⚠️ सावधान! कहीं आपका बैंक खाता भी तो नहीं हो रहा ‘रेंट’ पर इस्तेमाल? रायगढ़ में पकड़ी गई बड़ी मछलियां!…
रायगढ़। छत्तीसगढ़ की रायगढ़ पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के एक ऐसे मकड़जाल को ध्वस्त किया है, जिसके तार देशभर में फैले हुए थे। एसएसपी शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में नवगठित साइबर थाना पुलिस ने एक महिला NGO कार्यकर्ता को झांसे में लेकर उसके खाते से ₹2.17 करोड़ का संदिग्ध ट्रांजेक्शन करने वाले गिरोह के 5 सदस्यों को दबोच लिया है।
NGO को CSR फंड दिलाने का लालच देकर बनाया ‘मोहरा’… ठगी की यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। आरोपियों ने इंदिरानगर निवासी एक महिला समाजसेवी को उनकी संस्था के लिए CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड दिलाने का झांसा दिया। आरोपियों ने महिला का एक्सिस बैंक में खाता खुलवाया और नेट बैंकिंग का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया।
✈️ गुवाहाटी ले जाकर होटल में रखा बंधक जैसा, मोबाइल में डाला ‘खतरनाक’ APK : आरोपियों ने विश्वास जीतने के लिए महिला और उसके पति को फ्लाइट से गुवाहाटी बुलाया। वहां एक होटल में ठहराकर उनके मोबाइल में एक अज्ञात APK फाइल इंस्टॉल कर दी। करीब एक हफ्ते तक उन्हें वहीं रखा गया और उनके खाते का इस्तेमाल देशभर से ठगी गई रकम को खपाने (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए किया गया।
टेलीग्राम से चलता था ‘कमीशन का खेल’ : पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पकड़े गए आरोपी टेलीग्राम के जरिए बड़े साइबर अपराधियों से जुड़े थे।
- बैंक कनेक्शन : गिरोह का एक सदस्य अभय यादव पहले बैंक में काम कर चुका है, जिसे बैंकिंग सिस्टम की पूरी जानकारी थी।
- कमीशन : ये आरोपी कॉरपोरेट बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने के बदले ठगी की रकम का 5% से 15% तक कमीशन लेते थे।
- देशव्यापी नेटवर्क : पीड़ित महिला के खाते के खिलाफ देशभर में 44 साइबर शिकायतें दर्ज मिली हैं, जिनमें करोड़ों के विवादित लेनदेन का जिक्र है।
सलाखों के पीछे पहुंचे ये आरोपी :
- मितेश सोनी (दुर्ग-भिलाई) – गिरोह का मुख्य सूत्रधार।
- विजय चंद्रा (सक्ती) – महिला को जाल में फंसाने वाला।
- अजय साहू (रायगढ़) – स्थानीय नेटवर्क संभालने वाला।
- अभय यादव (रायगढ़) – पूर्व बैंक कर्मचारी, तकनीकी मास्टरमाइंड।
- सचिन चौहान (रायगढ़) – सहयोगी।
“जिले में साइबर थाना खुलने के बाद से जांच में जबरदस्त तेजी आई है। यह तो बस शुरुआत है, हम साइबर ठगों के पूरे नेटवर्क को नेस्तनाबूद कर देंगे।”
शशि मोहन सिंह, एसएसपी रायगढ़
क्या-क्या हुआ जब्त? – पुलिस ने आरोपियों के पास से 6 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप बरामद किया है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि वे अब तक विभिन्न राज्यों में 25 से 30 बैंक खाते फर्जीवाड़े के लिए उपलब्ध करा चुके हैं।
पुलिस की अपील : एसएसपी ने नागरिकों को आगाह किया है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक विवरण, मोबाइल या दस्तावेज न दें। CSR फंड या भारी मुनाफे के लालच में आकर अपना खाता ‘रेंट’ पर देना आपको जेल पहुंचा सकता है।




