कैंपस या जंग का मैदान? बिलासपुर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ‘खूनी होली’, पुलिस और प्रबंधन के दावों पर उठे सवाल…देखें वायरल वीडियो…

बिलासपुर। न्यायधानी का प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह शिक्षा नहीं, बल्कि कैंपस के भीतर हुई ‘बेल्टबाजी’ और हिंसा है। होली मिलन समारोह के दौरान छात्रों के दो गुटों में हुई जमकर मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसने विश्वविद्यालय के अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं।
रंगों के उत्सव में बरसाए बेल्ट और घूंसे : जानकारी के मुताबिक, ‘ब्रदरहुड संघ’ द्वारा परिसर में होली मिलन समारोह आयोजित किया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गुलाल लगाने की बात से शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया। वायरल वीडियो में छात्र एक-दूसरे पर लात-घूंसे और बेल्ट बरसाते नजर आ रहे हैं। जिस परिसर को संस्कार और अनुशासन का केंद्र माना जाता है, वहां मची इस अफरा-तफरी ने अभिभावकों और आम छात्रों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
पुलिस और दावों का ‘कन्फ्यूजन’ : सच छिपाने की कोशिश? – इस पूरे मामले में कोनी पुलिस की भूमिका और उनके बयानों ने नए विवाद को जन्म दे दिया है।
- पुलिस का दावा : कोनी पुलिस का कहना है कि वायरल फोटो आईटीआई (ITI) हनुमान मंदिर के पास की है और इसमें शामिल युवक आईटीआई के छात्र हैं। पुलिस ने यूनिवर्सिटी कैंपस में किसी भी तरह की मारपीट से साफ इनकार किया है।
- हकीकत का आईना : दूसरी तरफ, वायरल वीडियो में सेंट्रल यूनिवर्सिटी का बोर्ड स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वीडियो चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि घटना यूनिवर्सिटी के भीतर की है।
सवाल खड़ा होता है कि:
- क्या कोनी पुलिस का सूचना तंत्र इतना कमजोर है कि उसे चंद कदमों की दूरी पर हुई हिंसा की खबर नहीं?
- क्या विश्वविद्यालय प्रबंधन अपनी साख बचाने के लिए मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है?
- या फिर यूनिवर्सिटी और आईटीआई दोनों जगहों पर मारपीट हुई है और पुलिस केवल एक पक्ष देख पा रही है?
“विश्वविद्यालय परिसर में इस तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त से बाहर है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह शैक्षणिक माहौल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।” – एक चिंतित अभिभावक
प्रबंधन के मौन पर उठते सवाल : लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जांच का आश्वासन तो हर बार दिया जाता है, लेकिन धरातल पर कड़े कदम नदारद हैं। आखिर कब तक ‘अनुशासन’ के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाएगी?
फिलहाल, पुलिस किसी भी लिखित शिकायत न मिलने का हवाला देकर कार्रवाई से बच रही है। लेकिन वायरल वीडियो ने प्रशासन और पुलिस दोनों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।



