जालसाजी का ‘गुरुजी’ अब जेल में : 12 साल की नकली नौकरी का ‘क्लाइमेक्स’, जैजैपुर कोर्ट ने सुनाई कड़ी सजा…

सक्ती। शिक्षा के मंदिर में ‘गुरु’ का मुखौटा पहनकर दाखिल हुए एक जालसाज का असली चेहरा आखिरकार बेनकाब हो गया। जैजैपुर न्यायालय के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी राजेश खलखो ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए फर्जी शिक्षाकर्मी चितरंजन प्रसाद कश्यप को सलाखों के पीछे भेज दिया है। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी की नहीं, बल्कि सरकारी चयन प्रक्रिया की आंखों में धूल झोंकने की उस दुस्साहिक साजिश की है, जो 11 साल तक चलती रही।
अंकसूची का ‘कत्ल’ : 257 को बनाया 405 – जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। आरोपी ने साल 2007 में माल्दा के पीतांबर स्कूल से परीक्षा दी थी, लेकिन मेरिट लिस्ट में जगह बनाने के लिए उसने अपनी मार्कशीट का ही ‘कत्ल’ कर दिया:
- असली सच : आरोपी विज्ञान विषय में औसत छात्र था, जिसे 500 में से सिर्फ 257 नंबर मिले थे।
- फर्जीवाड़ा : उसने जादुई तरीके से इन नंबरों को 405 में बदल दिया।
- विषयों से छेड़छाड़ : जिस भौतिकी (Physics) में आरोपी फेल (सप्लीमेंट्री) था, वहां उसने कूटरचना कर ‘डिस्टिंक्शन’ दर्ज कर लिया।
- दोहरा दांव : केवल मार्कशीट ही नहीं, बल्कि एक फर्जी खेलकूद प्रमाण पत्र भी तैयार किया ताकि चयन समिति की आंखों में पूरी तरह धूल झोंकी जा सके।
कोर्ट का हंटर : धाराओं के जाल में फंसा जालसाज – सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी एस. अग्रवाल की दलीलों और पुख्ता सबूतों के आगे आरोपी का झूठ टिक नहीं सका। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी ने न केवल धोखाधड़ी की, बल्कि एक योग्य उम्मीदवार का हक भी मारा।
न्यायालय का कड़ा प्रहार :
- धारा 420 (धोखाधड़ी) : 2 साल का कठोर कारावास।
- धारा 468 (जालसाजी) : 1 साल की जेल।
- धारा 474 (फर्जी दस्तावेज रखना) : 1 साल की जेल।
- जुर्माना : अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
‘पोथीराम’ की सजगता ने ढहाया झूठ का किला : यह फर्जीवाड़ा कभी सामने नहीं आता, अगर ग्राम सेमरिया के पोथीराम कश्यप ने साल 2018 में हिम्मत न दिखाई होती। उनकी एक शिकायत ने पुलिस महकमे की नींद उड़ाई और जब जांच की फाइलें खुलीं, तो हसौद थाने में दर्ज FIR ने आरोपी के ‘नकली करियर’ का अंत कर दिया। साल 2019 में पेश हुए चालान पर अब जाकर न्याय की मुहर लगी है।
⚠️ कड़वा सच (संपादकीय टिप्पणी) : 11 साल तक सरकारी खजाने से वेतन डकारने वाला यह शख्स आज जेल में है। लेकिन सवाल उन अधिकारियों पर भी है जिन्होंने नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) करने में लापरवाही बरती। क्या उन पर भी गाज गिरेगी?




